परंपरागत कला को बाज़ार तक

blog-img

परंपरागत कला को बाज़ार तक
पहुँचा रही स्मृति की संस्था ‘साथिया’

मध्यप्रदेश की पहचान रही जरी-जरदोजी, बांस, मिट्टी और मेटल आर्ट जैसी पारंपरिक कला विधाएं आज भी कारीगर परिवारों द्वारा पीढ़ियों से संजोई जा रही हैं। ये कलाकार केवल हस्तशिल्प नहीं बनाते, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक इन कारीगर परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आ सका।

कारीगरों की स्थिति बदलने की पहल

इस चुनौती को अवसर में बदलने का काम किया भोपाल की स्मृति शुक्ला ने। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मृति ने पारंपरिक करियर विकल्पों से हटकर कारीगरों के साथ काम करने का निर्णय लिया और ‘साथिया’ संस्था की स्थापना की।

बैतूल से हुई साथिया की शुरुआत

स्मृति बताती हैं कि वर्ष 2006 में ‘साथिया’ की शुरुआत बैतूल जिले से हुई। शुरुआत में 4–5 महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के साथ काम किया गया। मुख्य उद्देश्य था कारीगरों के काम को पॉलिश करना, उन्हें बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना, परिवार का सहयोग बढ़ाना और कला में नए इनोवेशन को बढ़ावा देना। समय के साथ संस्था ने आर्टिस्ट कैपेसिटी बिल्डिंग, डिज़ाइन इनोवेशन, मार्केटिंग ट्रेनिंग और सरकारी योजनाओं से कनेक्ट करने जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया।

भोपाल से देश के बड़े बाज़ारों तक 

साथिया यह सुनिश्चित करती है कि हर कलाकार तक सरकारी योजनाओं और संसाधनों का पूरा लाभ पहुँचे। इसी प्रयास का परिणाम है कि भोपाल के सेल्फ हेल्प ग्रुप से निकलकर ‘खुशाली’ नाम की पहली कंपनी तैयार हुई। यह कंपनी जरी-जरदोजी के पारंपरिक काम को दिल्ली, मुंबई और पुणे जैसे बड़े राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचा रही है।

सैकड़ों कारीगरों का बढ़ता परिवार 

आज साथिया के साथ बैतूल में 550 से अधिक कारीगर जुड़े हुए हैं, जबकि भोपाल में यह संख्या 800 से ज्यादा हो चुकी है। जरी-जरदोजी के साथ-साथ बांस और मिट्टी कला से जुड़े कलाकार भी संस्था के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। 

मास्टर ट्रेनर बनते कारीगर

साथिया से जुड़े कई कलाकार अब इतने दक्ष हो चुके हैं कि वे मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभा रहे हैं। ये कलाकार अन्य कारीगरों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और सरकारी विभागों के साथ इम्पैनल्ड होकर काम कर रहे हैं। यह बदलाव न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि पारंपरिक कला को सम्मान और स्थायित्व देने की मिसाल भी है।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



डायबिटीज कंट्रोल के लिए हर्बल ड्रिंक: 
न्यूज़

डायबिटीज कंट्रोल के लिए हर्बल ड्रिंक:  , डॉ. रुपाली की खोज को मिला पेटेंट

21 प्रतिशत तक कम हुआ लोगों का शुगर लेवल, सफल ट्रायल के बाद मिला पेटेंट

शुचि मुले ने अंग्रेजी फिल्म के लिए बनाए 62 हजार पेंटेड फ्रेम
न्यूज़

शुचि मुले ने अंग्रेजी फिल्म के लिए बनाए 62 हजार पेंटेड फ्रेम

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से इंटरनेशनल आर्टिस्ट बनने तक का सफर,  भारत लौटकर आर्ट वर्कशॉप और डेमो के जरिए कला का प्रसार

अर्हमना तनवीर : ओलंपिक की ओर बढ़ती निशानेबाज़
न्यूज़

अर्हमना तनवीर : ओलंपिक की ओर बढ़ती निशानेबाज़

शूटिंग की कई प्रतियोगिताओं में जीते पदक, प्रदेश की अर्हमना तनवीर के ओलंपिक की ओर बढ़े कदम

राष्ट्रीय बेंच प्रेस चैम्पियनशिप : डॉ. कविता ने जीता रजत
न्यूज़

राष्ट्रीय बेंच प्रेस चैम्पियनशिप : डॉ. कविता ने जीता रजत

नेत्र रोग विशेषज्ञ होते हुए खेल जगत में बनाई अलग पहचान

इंदौर की अमी कमानी ने जीता महिला
न्यूज़

इंदौर की अमी कमानी ने जीता महिला , राष्ट्रीय स्नूकर चैंपियनशिप का खिताब

देश की दो शीर्ष खिलाड़ियों के बीच हुए इस मुकाबले में अमी ने दबाव के बीच शानदार खेल दिखाते हुए डिफेंडिंग चैंपियन को मात द...