बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी

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बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी
पर अफेयर के आरोप लगाना मानसिक क्रूरता

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस रजनी दुबे और एके प्रसाद ने कहा कि पक्के सबूत के बिना जीवनसाथी पर अफेयर (चरित्र शंका) के गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता है। हाई कोर्ट ने डॉक्टर की पत्नी के लगाए आरोपों को बेबुनियाद माना। साथ ही पति की तलाक की याचिका भी मंजूर कर ली।

जस्टिस रजनी दुबे और एके प्रसाद की बेंच ने डॉक्टर पत्नी को गुजारा भत्ता के तौर पर 25 लाख देने का आदेश दिया। पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी, मांग में सिंदूर लगाने से मना करती थी। मंगलसूत्र पहनने से भी मना कर दिया था। पति पर जानलेवा हमला भी किया था।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, सारंगढ़ निवासी डॉक्टर की शादी साल 2008 में भिलाई की रहने वाली महिला के साथ रायगढ़ में हुई थी। महिला भी पेशे से डॉक्टर हैं। शादी के बाद उनकी एक बेटी हुई, फिर कुछ समय बाद ही उनके संबंधों में दरार आ गया। इसके बाद दोनों 2014 से अलग रह रहे हैं।

पति का आरोप है कि, शादी के कुछ समय बाद ही उसकी पत्नी का व्यवहार लगातार अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया। पत्नी की तरफ से अवैध संबंधों के आरोप, बार-बार मानसिक प्रताड़ना और पारिवारिक सम्मानों को ठेस पहुंचाने के चलते वैवाहिक जीवन असहनीय हो गया।

पति ने आरोप लगाया कि, पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगी। मांग में सिंदूर नहीं लगाना, मंगलसूत्र पहनने से इनकार करना और उस पर जानलेवा हमला भी किया। झूठे अवैध संबंधों के आरोप लगाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

डॉक्टर पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी

इसी आधार पर पति ने दुर्ग के फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी लगाई, लेकिन फैमिली कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने लिखित बयान में पति का संबंध किसी अन्य महिला डॉक्टर से होने का गंभीर आरोप लगाया था।

पत्नी ने दावा किया था कि वह महिला उसके घर में जबरन घुसी और तोड़फोड़ की। हाईकोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2019 में दोनों साथ में फिल्म देखने गए थे, इसलिए अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता था, लेकिन हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया।

बिना सबूत चरित्र हनन क्रूरता का सबसे बुरा रूप

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि, एक शिक्षित भारतीय पत्नी का अपने पति पर बिना आधार और सबूत के चरित्र हनन का आरोप लगाना क्रूरता का सबसे बुरा रूप है। पति के अवैध संबंधों के आरोपों को साबित करने में पत्नी नाकाम रही, जिससे पति को मानसिक पीड़ा हुई। हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच तलाक की अर्जी मंजूर कर ली है। दोनों ही डॉक्टर हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, फिर भी बेटी की परवरिश और भविष्य की मुकदमेबाजी से बचने के लिए हाई कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को 25 लाख रुपए का एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह रकम 6 महीने के अंदर देनी होगी।

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