आईटीआई में बदलती सोच, महिलाएं बन

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आईटीआई में बदलती सोच, महिलाएं बन
रही ट्रैक्टर मैकेनिक और इलेक्ट्रिशियन

ग्वालियर। संभागीय आईटीआई में अब ट्रेड्स सिर्फ लड़कों तक सीमित नहीं रहे। ट्रैक्टर मैकेनिक, एसी-रेफ्रिजरेशन मैकेनिक, वेल्डर और ड्राफ्ट्समैन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में बेटियां भी तेजी से अपनी पहचान बना रही हैं। संभागीय आईटीआई, बिरला नगर के नोडल एवं प्लेसमेंट अधिकारी भूपेंद्र कुमार के अनुसार, दो-तीन साल पहले तक इन ट्रेड्स में लड़कियों की भागीदारी लगभग नगण्य थी, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

छात्राएं न सिर्फ इन कोर्सेस में प्रवेश ले रही हैं, बल्कि तकनीकी कौशल सीखने में भी गहरी रुचि दिखा रही हैं। इस बदलाव में स्कूल स्तर पर बढ़ती जागरूकता का भी बड़ा योगदान है। आईटीआई विजिट पर आने वाली छात्राएं अब केवल औपचारिक दौरा नहीं करतीं, बल्कि कोर्स, ट्रेनिंग और करियर संभावनाओं की विस्तृत जानकारी लेती हैं।

तकनीकी ट्रेड्स में करियर स्कोप

1. इलेक्ट्रिशियन और इलेक्ट्रॉनिक्स :  इंडस्ट्री, मेंटेनेंस और सर्विस सेक्टर में लगातार मांग बनी हुई है।

2. एसी-रेफ्रिजरेशन मैकेनिक : हर घर और ऑफिस में जरूरत के कारण सर्विस और रिपेयरिंग का बड़ा बाजार।

3. वेल्डिंग और फिटर : मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और रेलवे जैसे सेक्टर में अवसर।

4. ड्राफ्ट्समैन : आर्किटेक्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मांग।

5. ट्रैक्टर / डीजल मैकेनिक : ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में स्थायी रोजगार की संभावना।

आने वाले 5 साल में तकनीकी ट्रेड्स में बदलाव

कॅरियर काउंसलर दीप्ति गौड़ के अनुसार, आने वाले पांच साल में बेटियों की भागीदारी और तेजी से बढ़ेगी। लड़कों के ट्रेड जैसी धारणा धीरे-धीरे खत्म होगी और आईटीआई अधिक इंक्लूसिव बनेंगे। छात्राओं की बढ़ती संख्या के साथ-साथ अलग बैच, बेहतर सुरक्षा, हॉस्टल और महिला ट्रेनर्स जैसी सुविधाएं भी बढ़ेंगी। इंडस्ट्री में स्किल्ड वर्कफोर्स की मांग पहले से ही ज्यादा है, इसलिए इलेक्ट्रिशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एसी-रेफ्रिजरेशन और सर्विस सेक्टर में महिला टेक्नीशियन के लिए अवसर लगातार बढ़ेंगे। कंपनियां अब डाइवर्स वर्कफोर्स पर जोर दे रही हैं, जिससे बेटियों के लिए प्लेसमेंट और स्वरोजगार दोनों के रास्ते मजबूत होंगे।

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छात्राओं की सफलता की कहानी

आईटीआई में स्किल सीखने वाली खुशी सोनी ने रेलवे की तैयारी के साथ इलेक्ट्रिशियन ट्रेड चुना। उन्होंने कहा कि उन्हें तकनीकी काम सीखना था। पहले वे इसे लड़कों का क्षेत्र मानती थीं, लेकिन अब काम में रुचि बढ़ी है। आरजू बानो को मशीनिस्ट ट्रेड इसलिए पसंद आया क्योंकि इसमें सीखने के साथ आत्मनिर्भर बनने और नौकरी या स्वरोजगार के अच्छे अवसर दिखते हैं। टेक्नीशियन बनना उनका सपना था, जो अब पूरा हुआ।

आईटीआई में विशेष ट्रेड और छात्राओं की संख्या

ट्रेड                                                                  छात्राओं की संख्या

कंप्यूटर ऑपरेटर प्रोग्रामिंग (दृष्टिबाधित)                  02

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग                                               38

ड्राफ्ट्समैन सिविल                                             02

इलेक्ट्रिशियन                                                    14

इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक                                        08

ट्रैक्टर मैकेनिक                                                 01

डीजल मैकेनिक                                                03

फिटर                                                             06

मशीनिस्ट                                                        03

कुल विद्यार्थी: 920
छात्राएं: 230

सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर 

छाया : प्रतीकात्मक 

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

 

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