भोपाल। “जो तूफानों में पलते जा रहे हैं, वही दुनिया बदलते जा रहे हैं” यह पंक्तियां सिवनी की नौशीन खान पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। कभी टूटी हुई हॉकी स्टिक से खेलना शुरू करने वाली नौशीन आज भारतीय अंडर-18 महिला हॉकी टीम के कैंप तक पहुंच चुकी हैं।
मध्यप्रदेश महिला हॉकी अकादमी ग्वालियर में प्रशिक्षण ले रही नौशीन का चयन अंडर-18 भारतीय हॉकी प्रशिक्षण शिविर में हुआ है। भोपाल स्थित साई सेंटर में सम्पन्न शिविर में ऑस्ट्रेलिया सीरीज और जापान में होने वाले अंडर-18 एशिया कप के लिए कुल 24 खिलाड़ियों में से 18 खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम के लिए किया गया।
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कोच की नजर में खास खिलाड़ी
अकादमी की मुख्य कोच वंदना उइके के अनुसार, नौशीन एक बेहतरीन स्ट्राइकर हैं और गोल करने में माहिर हैं। उन्होंने बताया कि नौशीन का चयन 2023 में टैलेंट सर्च के दौरान हुआ था। कम उम्र में ही उनके खेल में आत्मविश्वास और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता दिखी। वह डी के अंदर बेहतरीन पोजिशनिंग के साथ अटैक करती हैं। नौशीन ने जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 9 गोल किए और फाइनल में टॉप स्कोरर रहीं।
टूटी स्टिक से शुरू हुआ सफर
नौशीन के पिता एहफाज खान, जो दिनभर मेहनत कर परिवार चलाते हैं, बताते हैं कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह नई हॉकी स्टिक नहीं खरीद सके। उन्होंने एक टूटी हुई स्टिक को ठीक करवाकर नौशीन को खेलने के लिए दी। मैदान पर कोई उसे टी-शर्ट देता था, कोई जूते तो कोई खेल किट, इस तरह दूसरों की मदद से नौशीन ने अपना खेल जारी रखा।
समाज के तानों के बीच पिता का संघर्ष
नौशीन के पिता को समाज के ताने भी सुनने पड़े। लोग कहते थे कि “लड़की को नेकर में खेला रहे हो।” लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और विश्वास रखा कि एक दिन बेटी ही जवाब देगी। आज वही लोग नौशीन के साथ फोटो खिंचवाने पहुंच रहे हैं। नौशीन की बहन तवारिक नाज भी मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं और परिवार का नाम रोशन करने की राह पर हैं।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : विभिन्न वेबसाइट



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