नई दिल्ली: Delhi High Court ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी पिता अपनी नाबालिग संतान के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से सिर्फ इस आधार पर मुक्त नहीं हो सकता कि मां उससे अधिक कमाती है। अदालत ने कहा कि बच्चों की परवरिश माता-पिता दोनों की समान कानूनी, नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
क्या है पूरा मामला?
मामला एक तलाकशुदा व्यक्ति की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी तीन नाबालिग संतानों के भरण-पोषण का खर्च उठाने का निर्देश दिया गया था। पिता का तर्क था कि उसकी पूर्व पत्नी उससे अधिक आय अर्जित करती है, इसलिए उसे खर्च वहन नहीं करना चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि माता-पिता की आय क्षमता उनकी जिम्मेदारी को कम नहीं करती। जो अभिभावक बच्चे की प्राथमिक देखभाल करता है, उसे दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। बच्चों की जरूरतें पूरी करना दोनों की समान जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि मां बच्चे की देखभाल के साथ-साथ कमाई भी कर रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि पिता की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है।
ये भी पढ़िए .....
पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट : पत्नी कामकाजी है फिर भी पति को देना होगा बच्चों का गुजारा भत्ता
जम्मू-कश्मीर/लद्दाख हाईकोर्ट : बेटियों को पिता की संपत्ति से नहीं किया जा सकता बेदखल
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह निर्णय उन मामलों में मिसाल बनेगा, जहां अक्सर पिता पत्नी की अधिक आय का हवाला देकर भरण-पोषण से बचने की कोशिश करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों का हित सर्वोपरि है। आर्थिक असमानता के आधार पर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। जेंडर न्याय और सामाजिक समानता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए । अदालत ने पिता की याचिका खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *