UN में डॉ. रीनू यादव ने महिला सशक्तिकरण

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UN में डॉ. रीनू यादव ने महिला सशक्तिकरण
को बताया सस्टेनेबल डेवलपमेंट

United Nations के मंच पर आयोजित सस्टेनेबल डेवलपमेंट वर्ल्ड फोरम (Sustainable Development World Forum) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. रीनू यादव (dr reenu yadav ) ने महिला सशक्तिकरण पर प्रभावशाली और प्रेरणादायक भाषण दिया। उनका संबोधन वैश्विक स्तर पर सराहा गया और लैंगिक समानता (जेंडर इक्वैलिटी) को लेकर एक मजबूत संदेश सामने आया। UN के इस महत्वपूर्ण मंच पर डॉ. रीनू यादव ने कहा कि अगर दुनिया को टिकाऊ विकास चाहिए, तो महिलाओं को केंद्र में रखना ही होगा। यह संबोधन न केवल भारत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जेंडर इक्वैलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

महिला सशक्तिकरण ही Sustainable Development की असली नींव

अपने भाषण में डॉ. रीनू यादव ने स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण कोई अतिरिक्त एजेंडा नहीं, बल्कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Sustainable Development) की मूल आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया को टिकाऊ और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ना है, तो महिलाओं को केंद्र में रखना अनिवार्य है।

महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का स्थान

डॉ. यादव ने विश्व नेताओं से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को साइडलाइन करने की सोच को खत्म किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिले। जेंडर इक्वैलिटी को हर डेवलपमेंट प्लान के केंद्र में रखा जाए।

 

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SDGs और महिला नेतृत्व का गहरा संबंध

उन्होंने Sustainable Development Goals (SDGs) का जिक्र करते हुए बताया कि महिला नेतृत्व हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभाता है। चाहे क्लाइमेट चेंज, आर्थिक विकास या सामाजिक न्याय, हर जगह महिलाओं की भागीदारी बदलाव को तेज करती है। अपने भाषण में उन्होंने कहा “सशक्त महिलाएं नए विचार लाती हैं, संकट में समाज को संभालती हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करती हैं। उनके बिना कोई भी बदलाव अधूरा है।”

महिलाओं की प्रगति के तीन स्तंभ

डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा (Education), आर्थिक स्वतंत्रता (Economic Independence)  और निर्णय लेने की शक्ति (Decision-Making Power)  तीन मुख्य आधार बताए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं में निवेश करना, दरअसल भविष्य में निवेश करना है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अपने अभियान Women Health Empowerment Campaign के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत होती हैं, तभी वे एक समान और बेहतर समाज का निर्माण कर सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिला समर्थन

डॉ. रीनू यादव के भाषण को वैश्विक मंच पर व्यापक समर्थन मिला। कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने उनके उस विचार को सराहा जिसमें उन्होंने कहा कि केवल SDGs हासिल करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए,  बल्कि एक न्यायपूर्ण और समानता आधारित दुनिया बनाना असली उद्देश्य है।

सन्दर्भ स्रोत/छाया : दैनिक भास्कर

संपादन : मीडियाटिक डेस्क  

 

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