सुप्रीम कोर्ट : आपसी सहमति से तलाक

blog-img

सुप्रीम कोर्ट : आपसी सहमति से तलाक
के समझौते से पीछे हटना आसान नहीं

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक (Mutual Divorce) से जुड़े मामलों में एक अहम और सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि एक बार दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर सहमत हो जाएं, तो बिना ठोस कारण के उससे पीछे हटना स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत ने इस तरह के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर भी गंभीर चिंता जताई है। 

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? 

जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि कानून भले ही तलाक के अंतिम आदेश से पहले सहमति वापस लेने की अनुमति देता है, लेकिन इस प्रावधान का इस्तेमाल समझौते की जिम्मेदारियों से बचने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि “जब दोनों पक्ष किसी विवाद के पूर्ण और अंतिम समाधान के रूप में समझौते पर सहमत हो जाते हैं और उसे मध्यस्थ द्वारा प्रमाणित कर दिया जाता है, तो उससे पीछे हटना गंभीर मामला है।” 

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में समझौते से मुकरने वाले पक्ष पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। 

मध्यस्थता (Mediation) की अहमियत पर जोर 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता से हुए समझौतों का सम्मान होना चाहिए. इनसे पीछे हटना न्यायिक प्रक्रिया की नींव को कमजोर करता है। ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना जरूरी है।

किन परिस्थितियों में मिल सकती है छूट? 

कोर्ट ने कुछ विशेष परिस्थितियों में ही समझौते से पीछे हटने की अनुमति दी है, जैसे धोखाधड़ी (Fraud), जबरदस्ती (Coercion). गलत प्रभाव (Undue Influence), दूसरी पार्टी द्वारा शर्तों का पालन न करना, इनके अलावा, दोनों पक्षों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने वादों को निभाएं। 

 

ये भी पढ़िए... 

झारखंड हाईकोर्ट : छोटे-मोटे मतभेद तलाक का आधार नहीं हो सकते

कलकत्ता हाईकोर्ट : भारतीय नागरिक, भारत में शादी, ब्रिटेन की कोर्ट नहीं दे सकती है तलाक

सुप्रीम कोर्ट : पति-पत्नी के अलग रहने का मतलब ये नहीं कि शादी पूरी तरह से टूट गई...

 

क्या था पूरा मामला?

यह फैसला एक वैवाहिक विवाद के मामले में आया, जिसमें पति-पत्नी की शादी साल 2000 में हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। 2022-23 के दौरान दोनों अलग रहने लगे। पति ने क्रूरता और व्यभिचार के आधार पर तलाक की अर्जी दी। मामला मध्यस्थता में गया, जहां दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक और सभी विवाद सुलझाने पर सहमति जताई। इसके बाद अगस्त 2024 में ‘पहला प्रस्ताव’ (First Motion) पूरा हुआ। लेकिन ‘दूसरे प्रस्ताव’ (Second Motion) से पहले पत्नी ने सहमति वापस ले ली। 

आगे क्या हुआ? 

पति ने पहले अवमानना याचिका दायर की, फिर उसे वापस ले लिया। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। अक्टूबर 2025 में पत्नी ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत नया मामला दर्ज किया। पति ने इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और केस रद्द करने की मांग की। हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी। 

फैसले का असर 

इस फैसले के बाद आपसी सहमति से तलाक के मामलों में गंभीरता बढ़ेगी। समझौते के बाद पीछे हटने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। मध्यस्थता प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।  इस तरह सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि आपसी सहमति से तलाक कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी प्रतिबद्धता है। एक बार सहमति देने के बाद उससे पीछे हटना अब आसान नहीं होगा, जब तक कि उसके पीछे ठोस और वैध कारण न हों।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट से महिला वकीलों को बड़ी
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट से महिला वकीलों को बड़ी , राहत: SCAORA चुनाव में पद आरक्षित

इस फैसले से यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब न्याय व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नेतृत्व में जगह मिलेग...

दिल्ली हाईकोर्ट : मां ज्यादा कमाती है
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : मां ज्यादा कमाती है , फिर भी बच्चे का पूरा खर्च पिता ही उठाएगा

अदालत ने एक तलाकशुदा व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने बच्चों के परवरिश का खर्च बराबर बांटने की मांग की थी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट : पति छात्र हो या बेरोजगार,
अदालती फैसले

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट : पति छात्र हो या बेरोजगार, , पत्नी को गुजारा भत्ता देना अनिवार्य

कोर्ट ने कहा - एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजगार प्राप्त करना संभव है और उसे अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए।

मप्र हाईकोर्ट : शादी की ज़िम्मेदारियों के लिए
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : शादी की ज़िम्मेदारियों के लिए , नौकरी छोड़ने वाली पत्नी भरण-पोषण की हकदार

हाईकोर्ट का अहम फ़ैसला -इंजीनियर पत्नी को ₹40 हज़ार भरण-पोषण देने का फ़ैसला बरकरार रखा