दिल्ली हाईकोर्ट : लिव-इन रिलेशन का

blog-img

दिल्ली हाईकोर्ट : लिव-इन रिलेशन का
हवाला देकर नहीं बच सकता आरोपी

नई दिल्ली: Delhi High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई भी आरोपी केवल इस आधार पर कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि वह पहले से किसी महिला के साथ लिव-इन संबंध में था। अदालत ने कहा कि यदि किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने के लिए शादी का झूठा वादा किया गया है और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं, तो यह धोखे की श्रेणी में आता है।

क्या है पूरा मामला?

मामला उस आरोप से जुड़ा है जिसमें अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने पीड़िता से विवाह का झूठा वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में पीड़िता को पता चला कि आरोपी पहले से ही एक अन्य महिला के साथ रह रहा था और उसके दो बच्चे भी हैं—यह तथ्य उससे छिपाया गया था।

 

 यह भी पढ़िए ....

राजस्थान हाईकोर्ट : लिव इन रिलेशनशिप को लेकर कानून बनाने की जरूरत

बिलासपुर हाईकोर्ट : लिव-इन रिलेशन मान्यताओं के खिलाफ, भारतीय संस्कृति के लिए कलंक

लिव इन में रहने वालों को तगड़ा झटका, ‘शपथ पत्र’ पर सख्त हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

 

अदालत की अहम टिप्पणी

न्यायमूर्ति Swarna Kanta Sharma ने सुनवाई के दौरान कहा: “यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि केवल लिव-इन संबंध होने से शादी के झूठे वादे का आरोप समाप्त हो जाता है। यदि महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं, तो धोखे का आरोप बना रहता है।” अदालत ने माना कि यदि महिला की सहमति धोखे या गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त की गई है, तो ऐसी सहमति वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में आरोपी द्वारा अपनी पूर्व स्थिति छिपाना एक महत्वपूर्ण तथ्य माना गया। 

अग्रिम जमानत याचिका खारिज

अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुआ। साथ ही, पहले की कार्यवाही में अदालत को गुमराह करने का प्रयास भी किया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



विवाह से नहीं बदलती जाति, आरक्षण पर
अदालती फैसले

विवाह से नहीं बदलती जाति, आरक्षण पर , पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला

कहा - जाति जन्म से तय होती है, शादी से नहीं दूसरे राज्य में शादी करने पर नहीं मिलेगा OBC आरक्षण का लाभ

पति के पास बेवफाई के सबूत मप्र हाईकोर्ट ने तस्वीरों को माना सही
अदालती फैसले

पति के पास बेवफाई के सबूत मप्र हाईकोर्ट ने तस्वीरों को माना सही

एमपी हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक मामलों में 65-बी सर्टिफिकेट के बिना भी तस्वीरों को सबूत माना जा सकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट -पति-पत्नी के साथ
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट -पति-पत्नी के साथ , रहते जन्मा बच्चा पति की ही वैध संतान

कोर्ट ने अपने निर्णय में जोर दिया कि विवाह के दौरान जन्मे बच्चे की वैधता को केवल अत्यंत ठोस साक्ष्यों से ही चुनौती दी जा...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट: वैवाहिक अधिकारों की
अदालती फैसले

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट: वैवाहिक अधिकारों की , डिक्री न मानने पर पति को तलाक का हक

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को धारा 13(1A)(ii) के तहत तलाक का अधिकार दिया पत्नी ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली की डिक्री...