इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को अपने शरीर और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
जुड़वा गर्भावस्था में गर्भसमापन की अनुमति
प्रयागराज की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने एक पीड़िता को गर्भ समापन (Abortion) की अनुमति प्रदान की। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक सविता पाठक ने मेडिकल रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि पीड़िता लगभग सात सप्ताह की जुड़वा गर्भावस्था से गुजर रही थी।
19 मार्च को जिला महिला अस्पताल प्रयागराज में किए गए अल्ट्रासाउंड में दोनों भ्रूण जीवित पाए गए थे।
शारीरिक स्वायत्तता का सम्मान जरूरी
मामले की सुनवाई कर रहीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया ने कहा कि महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी महिला को अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिगों और अनचाही गर्भावस्था से जुड़े मामलों में महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर अनावश्यक बाधाएं नहीं लगाई जा सकतीं।
प्रशासनिक देरी पर कोर्ट की नाराजगी
• कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के परिजनों ने 9 मई को ही जांच अधिकारी को गर्भावस्था की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद गर्भपात की प्रक्रिया को लेकर समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
• न्यायालय ने पीड़िता की स्थिति और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए गर्भसमापन की अनुमति को उचित ठहराया तथा संबंधित चिकित्सा अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
• लंबित आपराधिक मामले के आधार पर पासपोर्ट नहीं रोका जा सकता
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पासपोर्ट आवेदन पर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर किसी नागरिक के पासपोर्ट आवेदन को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रशांत की खंडपीठ ने मरियम बानो की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
जांच लंबित होना खारिजी का आधार नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता निर्भय कुमार भारती ने अदालत को बताया कि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने लंबित आपराधिक मामले के कारण आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया।
कोर्ट ने पवन कुमार राजभर बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि केवल जांच स्तर पर लंबित आपराधिक मामला पासपोर्ट आवेदन खारिज करने का आधार नहीं बन सकता।
विदेश यात्रा के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी
अदालत ने हर्षित वैश बनाम यूपी राज्य मामले और विदेश मंत्रालय के 6 दिसंबर 2024 के कार्यालय ज्ञाप का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग से एनओसी की आवश्यकता नहीं है। हालांकि संबंधित अदालत से विदेश यात्रा की अनुमति प्राप्त होना अनिवार्य है।
यदि अदालत पासपोर्ट की अवधि निर्धारित नहीं करती है तो 25 अगस्त 1993 की अधिसूचना के अनुसार पासपोर्ट एक वर्ष की अवधि के लिए जारी किया जाएगा।
पासपोर्ट अधिकारी को तीन माह में निर्णय का निर्देश
हाईकोर्ट ने मरियम बानो को एक माह के भीतर क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के समक्ष नया प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही पासपोर्ट अधिकारी को नियमों और न्यायिक निर्णयों के अनुरूप तीन माह के भीतर उचित निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इन दोनों फैसलों ने महिला अधिकारों, प्रजनन स्वतंत्रता, व्यक्तिगत गरिमा और पासपोर्ट संबंधी कानूनी अधिकारों को मजबूती प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासनिक प्रक्रियाएं नागरिकों के अधिकारों में अनावश्यक बाधा नहीं बन सकतीं।



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