पुष्पा जोशी

blog-img

पुष्पा जोशी

चित्रांकन : ज़ेहरा कागज़ी

प्रतिभा- टेलीविजन, सिनेमा और रंगमंच

2018 में आई अजय देवगन की फिल्म ‘रेड’ असल घटनाओं से प्रेरित थी। इसमें अजय के साथ सौरभ शुक्ला, इलियाना डि क्रूज़, अमित सियाल के साथ जिस बुजुर्ग कलाकार ने काम किया, वे थीं जबलपुर की पुष्पा जोशी। फ़िल्मी दुनिया में प्रवेश करने वाली पुष्पा जी देश की सबसे उम्रदराज़ महिला कलाकार थीं। जब उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘रेड’ की शूटिंग शुरू की थी, तब वो 85 साल की थीं। उनका जन्म कब हुआ था ,ठीक-ठीक पता नहीं।उनके बेटे रविंद्र के मुताबिक वो 1932-33 में पैदा हुई थीं और 14 साल की उम्र में तहसीलदार बी.आर जोशी के साथ उनकी शादी हो गई। जवानी के दिनों में पुष्पा जी नाटकों में काम किया करती थीं, लेकिन अभिनय को करियर बनाने के प्रति गंभीर नहीं रहीं। रविंद्र भी रंगकर्मी हैं जबकि पोते आभास वॉइस ऑफ इंडिया और म्यूज़िक का महा मुकाबला जैसे गायन के रियलिटी शो में हिस्सा ले चुके हैं।

रविंद्र ने अपनी मां को लेकर ‘ज़ायका’ शीर्षक से फिल्म बनाई। इसकी कहानी और संवाद भी रविंद्र ने ही लिखे थे। उस समय ‘रेड’ फिल्म के लिए कलाकारों का चयन हो रहा था, तभी चयनकर्ताओं की नज़र ज़ायका पर पड़ी। पुष्पा जी का काम देखने के बाद उन्हें ऑडिशन के लिए बुलाया गया तो लोग उनकी एनर्जी और हंसोड़ शख़्सियत के कायल हो गए। पुष्पा जी ने ‘रेड’ में सौरभ शुक्ला की मां का किरदार निभाया था जिसे न केवल दर्शकों बल्कि फिल्म समीक्षकों ने भी सराहा था। इस फिल्म में उनका किरदार भले ही छोटा था लेकिन वे अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही थीं। उनकी संवाद अदायगी और हाव भाव ऐसे थे जैसे दर्शक अपनी नानी या दादी को साक्षात देख रहे हों। यहां तक कि ‘रेड’ देखने के बाद काजोल तो पुष्पा जी को अपने घर ही ले जाना चाहती थीं।

पुष्पा जी को रणवीर सिंह की ‘गली बॉय’ और शाहिद कपूर की ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ जैसी फ़िल्मों में काम करने का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उनकी सेहत के मद्दे नज़र उन्हें नामंज़ूर कर दिया गया। लघु एवं फ़ीचर फिल्मों बाद पुष्प जी ने विज्ञापन फ़िल्म में भी यादगार अभिनय किया। फ़ेविक्विक की एक फिल्म में पुष्पा जी कबाड़ी की भूमिका में दिखाई दी थीं। वहां उनका ‘ओह यस’ कहना इतना पसंद किया गया कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होकर त्वरित हास्य का प्रतीक बन गईं। उन्हें नाम दिया गया ‘स्वैग वाली दादी’। उन्हें फ़ेविक्विक शृंखला की अन्य फिल्मों में लिया गया।

नवंबर 2019 में पुष्पा जी अपने घर के बाथरूम में फिसलकर गिर गई थीं। इसके बाद उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती करवाया गया,जहाँ उनका ऑपरेशन हुआ। एक दिन अचानक से उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। 26 नवंबर की रात उन्होंने आखिरी सांस लीं।

संदर्भ स्रोत – लल्लनटॉप डॉट कॉम पर प्रकाशित आलेख के सम्पादित अंश एवं अमर उजाला 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



कबीर वाणी को जन-जन तक
ज़िन्दगीनामा

कबीर वाणी को जन-जन तक , पहुंचाना ही मिशन है अंजना का 

अंजना सक्सेना संगीत और कबीर वाणी के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने तथा नई पीढ़ी को संत कबीर के विचारों से जोड़ने का...

बिंदु जुनेजा : भाव, भक्ति और अभिव्यक्ति का अनूठा संगम
ज़िन्दगीनामा

बिंदु जुनेजा : भाव, भक्ति और अभिव्यक्ति का अनूठा संगम

बिंदु जुनेजा एक प्रमुख ओडिसी नर्तकी हैं जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को भाव और भक्ति के माध्यम से नई ऊँचाइयाँ दी हैं

पल्लवी व्यास : जिन्हें जीवन के खालीपन
ज़िन्दगीनामा

पल्लवी व्यास : जिन्हें जीवन के खालीपन , से मिली पोषण क्रांति की प्रेरणा 

पल्लवी व्यास ने निजी संघर्षों को ताकत बनाकर मोरिंगा आधारित पोषण क्रांति की शुरुआत की। आज वे कुपोषण मुक्त भारत, ऑर्गेनिक...

“इसे ज़हर दे दो…” से 'देश की 100
ज़िन्दगीनामा

“इसे ज़हर दे दो…” से 'देश की 100 , प्रभावशाली महिलाओं' तक बबली गंभीर 

शारीरिक चुनौतियों और सामाजिक तानों को हराकर बबली गंभीर ने संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर तय किया और देश की 100 प्...

चित्तरूपा पालित : जन आंदोलन, संघर्ष और जेल यात्रा की दास्तान
ज़िन्दगीनामा

चित्तरूपा पालित : जन आंदोलन, संघर्ष और जेल यात्रा की दास्तान

चित्तरूपा पालित ने नर्मदा घाटी से लेकर महेश्वर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध आंदोलनों तक उन्होंने जल, जंगल, जमीन और आद...

इंदिरा आयंगर : जिन्होंने सेवा को बना लिया जीवन का लक्ष्य
ज़िन्दगीनामा

इंदिरा आयंगर : जिन्होंने सेवा को बना लिया जीवन का लक्ष्य

इंदिरा आयंगर की प्रेरक कहानी जिन्होंने भोपाल में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीवन समर्पित किया