कल्पना झोकरकर

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कल्पना झोकरकर

चित्रांकन : ज़ेहरा कागज़ी

  कलाकार - संगीत एवं नृत्य 

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायकी में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका कल्पना झोकरकर का जन्म इंदौर में 25 जून 1957  को हुआ। उनके पिता पंडित कृष्णराव मुजुमदार स्वयं देवास के स्वनामधन्य शास्त्रीय गायक उस्ताद रजब अली खां साहब के पट्ट शिष्य थे एवं मामा साहब के नाम से जाने जाते थे। माँ श्रीमती कुमुदनी मुजुमदार गृहणी थीं। पारिवारिक वातावरण संगीतमय होने के कारण कल्पना जी में सुर और ताल की समझ विकसित होना स्वाभाविक सी बात थी। उनकी रुचि देखते हुए अल्पायु में ही पिता ने शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया। कल्पना जी हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा अहिल्या आश्रम, इंदौर में हुई। रियाज़ और पढ़ाई-लिखाई साथ-साथ चलते रहे। 

फिर वह वक़्त भी आया जब शहर के छोटे-छोटे कार्यक्रमों के साथ आकाशवाणी से भी वे गायन प्रस्तुतियां देने लगीं थीं। वर्ष 1977 में आकाशवाणी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उपशास्त्रीय संगीत में उन्हें स्वर्ण पदक एवं सुगम संगीत में रजत पदक प्राप्त हुआ। वर्ष 1974 में हायर सेकेंडरी के बाद उन्होंने गर्ल्स डिग्री कॉलेज में बीए में दाख़िला लिया तो पाठ्यक्रम में एक विषय संगीत भी था। वर्ष 1980 में उन्होंने शास्त्रीय संगीत विषय लेकर स्नातकोत्तर की उपाधि स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त की। इसके बाद सामान्यतः लोग नौकरी की तलाश  में जुट जाते हैं, लेकिन कल्पना जी रियाज़ पर ध्यान केन्द्रित करते हुए मंच प्रस्तुतियों में व्यस्त हो गईं। कल्पना जी का मानना है कि स्कूल – कॉलेज में लगातार गायन पढ़ाने से गला खराब हो जाता है। एक ही पाठ्यक्रम को दोहराते रहने से रचनात्मकता भी मुरझा जाती है।

वर्ष 1983 में माता-पिता की पसंद से उनका विवाह श्री उमेश झोकरकर से हुआ जो उस समय हैदराबाद में कार्यरत थे। 1985 में उमेश जी ने इंदौर आकर अपने पारिवारिक व्यवसाय को ही आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया। इस तरह कल्पना जी भी वापस आ गईं। ससुराल में संगीत के प्रति आदर भाव होने के कारण कल्पना जी को अभ्यास और मंच प्रस्तुतियों  में कभी कोई दिक्कत नहीं आई। अपनी तमाम जिम्मेदारियों के साथ वे प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के रियाज़ लिए वक़्त निकाल ही लेती थीं। स्थायी रूप से इंदौर आ जाने पर पिता और गुरु कृष्णराव जी का सानिध्य एवं मार्गदर्शन आगे भी मिलता रहा। 

आगे चलकर उन्होंने सुशीला पोहनकर एवं पंडित वसंत राजुरकर से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुशीला जी के गायन में जयपुर, किराना एवं ग्वालियर घराने का मिश्रित सौंदर्य अभिव्यक्त होता हैं, उनके पिता एवं उनके गुरु ने भी दो-तीन घरानों से सीखा था एवं स्वयं कल्पना जी को भी दो तीन घरानों के दिग्गज संगीतज्ञों से सीखने का अवसर प्राप्त हुआ था। इस प्रकार नए प्रयोगों के लिए उन्हें एक अनंत आकाश मिला क्योंकि घराने के वर्जनाओं से वे पूर्णतया मुक्त ही रहीं। वे आज भी शास्त्रीय संगीत में आकाशवाणी की उच्च श्रेणी कलाकार हैं। आकाशवाणी के संगीत सम्मेलनों के अलावा दूरदर्शन के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी शिरकत कर चुकी हैं।

कल्पना जी अब देश के सभी प्रमुख संगीत महोत्सवों में अपनी गायन प्रस्तुतियां दे चुकी हैं, जैसे – तानसेन संगीत समारोह (ग्वालियर), सवाई गंधर्व संगीत समारोह(पुणे), एन.सी.पी.ए.(मुंबई), भारत भवन(भोपाल), सम्राट संगीत समारोह (गोवा), डॉ. वसंतराव देशपांडे संगीत समारोह(नागपुर), उस्ताद रहमत खां संगीत समारोह (मैहर), ठुमरी महोत्सव, साहित्य कला परिषद्, दिल्ली आदि । इसके अलावा वे अमेरिका, इंग्लैंड, अफ्रीका, दुबई, कुवैत, सिंगापुर एवं मस्कट के भी प्रतिष्ठित मंचो पर अपने सुरों के जादू बिखेर चुकी हैं। विभिन्न संगीत कंपनियों के माध्यम से उनके कई अल्बम प्रकाशित हुए हैं जिन्हें खूब सराहा गया।

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कल्पना जी मुंबई, पुणे, ठाणे एवं टेम्पल ऑफ़ फाइन आर्ट्स, सिंगापुर में ख्याल, ठुमरी एवं टप्पा विषय पर आयोजित कार्यशालाओं में सम्मिलित होकर नयी पीढ़ी के गायकों को लाभान्वित कर चुकी हैं। कल्पना जी ने दो वृत्त चित्रों का भी निर्माण व निर्देशन किया है जिनमे से प्रथम ‘सादा तबीयत के सुरीले साधक’ उनके पिता एवं गुरु पंडित कृष्णराव  मुजुमदार पर एवं द्वितीय ‘एक सुरीला दरवेश’ उस्ताद रजब अली खान साहब पर आधारित है।

वर्तमान में कल्पना जी इंदौर में निवास कर रही है और अपने संयुक्त परिवार में रहते हुए आज भी रियाज़ और मंच प्रस्तुतियों में व्यस्त रहती हैं। इनकी दो बेटियाँ हैं जिनमे बड़ी बेटी माइक्रो बायोलॉजी में पीएचडी के लिए कैलिफोर्निया में हैं एवं पुणे में रहने वाली दूसरी बेटी अनुजा गायन में माँ के नक़्शे कदम पर चलते हुए गायकी में नाम रोशन कर रही हैं।

पुरस्कार

  1. वर्ष 1993 में महाकाल मंदिर समिति उज्जैन एवं अभिनव कला परिषद् द्वारा महाकाल संगीत सम्मान
  2. वर्ष 1996-में अभिनव कला परिषद् द्वारा अभिनव कला सम्मान
  3. वर्ष 1998 में आकाशवाणी केंद्र भोपाल, प्रसार भारती द्वारा कला साधना सम्मान
  4. वर्ष 2000 में खरे इंस्टीट्यूट द्वारा मध्यप्रदेश गौरव पुरस्कार
  5. वर्ष 2005 में आर्य प्रसारक मंडल, पुणे द्वारा श्रीमती वत्सला भीमसेन जोशी पुरस्कार
  6. वर्ष 2007 में भारत गायन समाज, पुणे द्वारा इन्दिरा बाई खाडिलकर पुरस्कार
  7. वर्ष 2011 में डॉ. गंगुबाई हंगल फाउंडेशन, हुबली द्वारा श्रीमती कृष्णा हंगल राष्ट्रीय पुरस्कार
  8. वर्ष 2012 में महाकाल मंदिर समिति एवं अभिनव कला परिषद् द्वारा महाकाल संगीत रत्न पुरस्कार
  9. वर्ष 2017 में पूर्णवाद संस्था द्वारा पूर्णावद विद्या कला नीति संगीत उपासक पुरस्कार
  10. वर्ष 2019 में सानंद न्यास द्वारा सानंद जीवन गौरव पुरस्कार

संदर्भ स्रोत – कल्पना झोकरकर जी से सारिका ठाकुर से बातचीत पर आधारित 

© मीडियाटिक

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