सुप्रीम कोर्ट : बेटी की शादी का खर्च उठाना पिता का स्वाभाविक कर्तव्य

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सुप्रीम कोर्ट : बेटी की शादी का खर्च उठाना पिता का स्वाभाविक कर्तव्य

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि बेटी की शादी के समय पैतृक संपत्ति बेची जा सकती है। यह फैसला जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने सुनाया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिंदू अविभाजित परिवार का मुखिया 'कानूनी आवश्यकता' के मकसद के लिए संयुक्त परिवार की संपत्ति का विक्रय या हस्तांतरण कर सकता है। इसमें बेटी की शादी भी शामिल है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा हस्तांतरण उस स्थिति में भी वैध रहेगा, जब शादी संपत्ति की बिक्री से पहले ही हो चुकी हो। 

परिवार की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है असर 

अदालत ने 17 सितंबर को दिए फैसले में कहा कि सामान्य जानकारी है कि परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए भारी कर्ज उठाते हैं और यह कर्ज वर्षों तक परिवार की वित्तीय स्थिति पर असर डालता है। इसलिए कर्ता द्वारा शादी के खर्च के लिए संपत्ति का विक्रय करना न्यायोचित है। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

हाईकोर्ट के फैसले को कर दिया रद्द 

हाईकोर्ट ने यह माना था कि शादी के कई साल बाद किया गया बिक्री विलेख (सेल डीड) कानूनी आवश्यकता आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। मामला एक बेटे ने दायर किया था उसने पिता (पहले प्रतिवादी) द्वारा की गई HUF संपत्ति की बिक्री को चुनौती दी थी।

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