सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल मदर की याचिका की सुनवाई

blog-img

सुप्रीम कोर्ट ने सिंगल मदर की याचिका की सुनवाई
करते हुए हाईकोर्ट को दी सीख, 'माता-पिता की तरह बर्ताव करिए

सुप्रीम कोर्ट ने एक सिंगल मदर से जुड़ी याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के कामकाज के तरीके पर अहम टिप्पणी की है। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने एक महिला जज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि झारखंड हाईकोर्ट को महिला याचिकाकर्ता की याचिका पर शालीनता से सुनवाई करना चाहिए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि हाईकोर्ट के फैसलों में अहंकार नहीं दिखना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान की है, जिसमें उन्होंने ट्रांसफर के लिए गुहार लगाई थी। महिला जज का ट्रांसफर दुमका कर दिया गया है। पहले वह हजारीबाग में पोस्टेड थीं। महिला ने सिंगल मदर होने और बेटे की शिक्षा का हवाला देते हुए किसी ऐसे शहर में ट्रांसफर की मांग की थी, जहां बेहतर स्कूल हों। 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई समेत दो जजों की बेंच ने कहा कि यह जज की तरफ से सुविधा के लिए दी गई ट्रांसफर की याचिका नहीं है। यह एक बच्चे की शिक्षा से भी जुड़ा मामला है। कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट से यह भी कहा कि अहंकारी रवैया अपनाने के बजाए महिला जज की तबादले की याचिका को संवेदना की नजरों से देखा जाना चाहिए। अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) की याचिका पर बेंच ने यह टिप्पणी की है। कोर्ट कहा, 'हाई कोर्ट को अपने न्यायिक अधिकारियों की समस्याओं के प्रति सजग रहना होगा।' 

सिंगल मदर की याचिका पर CJI ने की अहम टिप्पणी इस मामले में याचिकाकर्ता एक सिंगल मदर हैं और उन्होंने हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उन्हें बोकारो, रांची या हजारीबाग जैसे किसी शहर में ट्रांसफर किया जाए, क्योंकि वहां बेहतर स्कूल हैं। अगले साल उनके बेटे की 12वीं बोर्ड परीक्षा है। ऐसे में याचिकाकर्ता की कोशिश है कि न्यायिक सेवाओं के साथ ही वह बेटे की पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। महिला जज ने 6 महीने के लिए चाइल्ड केयर लीव की याचिका लगाई थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने कहा, 'हाई कोर्ट को अपने न्यायिक अधिकारियों की याचिका पर विचार करते हुए किसी माता-पिता की तरह सोचना चाहिए। अहंकार का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। सीजेआई ने कहा,'अब आप या तो उन्हें (महिला जज) बोकारो स्थानांतरित करें या मार्च/अप्रैल, 2026 तक परीक्षा खत्म होने तक हजारीबाग में ही रहने दें।'

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



इलाहाबाद हाईकोर्ट : पत्नी के पास अलग रहने
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : पत्नी के पास अलग रहने , के पर्याप्त कारण, तो गुजारा-भत्ता की हकदार

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पति और पत्नी के बीच लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही है, जिसमें दहेज उत्पीड़न...

मप्र हाईकोर्ट : 13 साल का रिश्ता है, इसलिए रेप असंभव
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : 13 साल का रिश्ता है, इसलिए रेप असंभव

हाईकोर्ट ने 'आपसी सहमति' बताकर रद्द की लेफ्टिनेंट कर्नल पर हुई FIR

कलकत्ता हाईकोर्ट : पति की नौकरी खतरे में डालना भी क्रूरता
अदालती फैसले

कलकत्ता हाईकोर्ट : पति की नौकरी खतरे में डालना भी क्रूरता

सीआईएसएफ जवान मामले में कोर्ट ने पत्नी के दावे विरोधाभासी पाए

मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार की अर्जी
अदालती फैसले

मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार की अर्जी , पर सुप्रीम कोर्ट  : बराबरी का एक रास्ता UCC भी

CJI ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में कहीं ऐसा न हो कि हम मुस्लिम महिलाओं को मौजूदा अधिकारों से भी वंचित...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट  : आदिवासी भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में
अदालती फैसले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट  : आदिवासी भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया और एक आदिवासी समुदाय के व्यक्ति के साथ अनुसूचित जाति की महिला के तल...

बॉम्बे हाईकोर्ट : स्तनपान करने वाली बच्ची का हित मां के साथ
अदालती फैसले

बॉम्बे हाईकोर्ट : स्तनपान करने वाली बच्ची का हित मां के साथ

कोर्ट ने यह आदेश महिला द्वारा अपनी बेटी की कस्टडी की मांग करने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया गया।