मप्र हाई कोर्ट : बाल विवाह कराने वाले माता-पिता भी जिम्मेदार

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मप्र हाई कोर्ट : बाल विवाह कराने वाले माता-पिता भी जिम्मेदार

  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बाल विवाह के एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि पति के पास पत्नी के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो वह उन माता-पिता से सहायता मांग सकता है, जिन्होंने कानून का उल्लंघन कर कम उम्र में विवाह कराया था।

भरण-पोषण राशि 3 गुना बढ़ी

जस्टिस गजेंद्र सिंह ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए भरण-पोषण राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये प्रतिमाह कर दिया। यह राशि 7 अगस्त 2021 से प्रभावी मानी जाएगी और एरियर सहित देनी होगी।

13 साल की उम्र में हुई थी शादी

मामले में जब विवाह हुआ था, तब लड़की की उम्र 13 वर्ष और लड़के की उम्र 18 वर्ष थी। इससे पहले नीमच फैमिली कोर्ट ने पत्नी को केवल 2000 रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, जिसे हाई कोर्ट ने अपर्याप्त माना।

लड़कियों के अधिकारों पर चिंता

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता पहले बाल विवाह की शिकार हुई और अब उसे बेहद कम भरण-पोषण राशि देकर दोबारा प्रताड़ित किया जा रहा है। न्यायालय ने इसे लड़कियों के अधिकारों की दुखद तस्वीर” बताया और कहा कि किसी भी महिला को उचित भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।

 फैसले की 3 बड़ी बातें 

  • 6000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण राशि आवेदन की तारीख 7.8.2021 से लागू होगी।

  • बाल विवाह कराने वाले माता-पिता को भविष्य में वित्तीय जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहना होगा।

  • नीमच फैमिली कोर्ट को आदेश की प्रति भेजकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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