नई दिल्ली। Delhi High Court ने एक व्यक्ति के खिलाफ अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि उसने शादी से जुड़े समझौते के आधार पर अपने खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामला रद्द करवाया और बाद में पत्नी को छोड़कर आर्थिक सहायता देना भी बंद कर दिया।
कोर्ट ने प्रतिवादी पति से जवाब मांगा है कि उसके खिलाफ Contempt of Courts Act 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की गई है।
2021 की FIR से जुड़ा मामला
यह मामला वर्ष 2021 में दर्ज FIR से संबंधित है, जिसमें महिला ने रेप और नशीला पदार्थ देने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। केस दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों ने निकाह किया और अप्रैल 2022 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसी समझौते के आधार पर अदालत ने आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी थी।
बंद कर दी आर्थिक मदद
समझौते के अनुसार पति को पत्नी के रहने और घरेलू खर्च की जिम्मेदारी उठानी थी। साथ ही हर महीने 25 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का भी प्रावधान था। याचिकाकर्ता महिला का आरोप है कि मामला रद्द होते ही पति ने सभी भुगतान बंद कर दिए और उसे छोड़ दिया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ क्रूरता की गई और समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया।
दूसरी शादी के बाद बढ़ा विवाद
कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने के कई प्रयास किए। इसके बावजूद प्रतिवादी ने कथित तौर पर रजिस्टर्ड डाक और WhatsApp के माध्यम से तलाक का नोटिस भेज दिया। बाद में उसने दूसरी महिला से शादी भी कर ली।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों से राहत मिलने के बाद प्रतिवादी ने समझौते की शर्तों की पूरी तरह अनदेखी की। अदालत ने इस व्यवहार को गंभीर मानते हुए अवमानना नोटिस जारी किया है।



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