संगीत की विरासत संभाल रही हैं मीता पंडित

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संगीत की विरासत संभाल रही हैं मीता पंडित

छाया: मीता पंडित के एफ़बी अकाउंट से

विशिष्ट महिला 

• ग्वालियर घराने की छठी पीढ़ी से हैं सम्बंधित

•  भाई तुषार पंडित की मौत के बाद मिला घराने का उत्तराधिकार

ग्वालियर घराने (gwalior-gharana) की ख़याल गायकी (khayal gayaki) से ताल्लुक़ रखने वाली मीता अपने परिवार की छठी पीढ़ी से आती हैं। साथ ही वो पंडित ख़ानदान की पहली महिला ख़याल गायिका भी हैं। उनके परदादा शंकर पंडित (shankar pandit) ग्वालियर घराने के संस्थापक हदू ख़ां-हस्सू ख़ां (hadu khan-hassu khan) के शिष्य और अपने समय के अग्रणी गायक थे। दादा कृष्णराव पंडित (krishna rao pandit) बीसवीं सदी के दिग्गज गायकों में से थे और उनके पिता लक्ष्मण पंडित (laxman pandit) भी ग्वालियर घराने के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज (Lady Shri Ram College) से बीकॉम करने के बाद मीता ने संगीत में एमए और फिर पीएचडी किया.सन् 1994 में भाई तुषार पंडित की एक सडक़ दुर्घटना में  निधन हो जाने और वंश परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मीता को ही शास्त्रीय संगीत की दुनिया में आना पड़ा। मीता 20वीं शताब्दी के महान् भारतीय शास्त्रीय संगीत गुरु पद्मभूषण पं.कृष्णराव शंकर पंडित की पौत्री और पंडित लक्ष्मण कृष्णराव पंडित की बेटी हैं।

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14 सितम्बर 1974 को जन्मीं मीता ने अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति 1985 में भोपाल के भारत भवन में अपने दोनों भाइयों के साथ दी थी, तब वे महज 9 वर्ष की थीं। अपनी सधी हुई आवाज में मीता अपने प्रशंसकों को रागों की जटिलता समझाने में कामयाब रही हैं। मीता ख्याल, टप्पा के अलावा तराना, भजन, ठुमरी और सूुफी संगीत  गाने में भी निपुण हैं। वह बड़े पैमाने पर भारत के प्रतिष्ठित मंचों पर संगीत प्रस्तुत कर चुकी हैं। सन् 2003 में फ्रांस सरकार के आमंत्रण पर वे पेरिस गईं और वहां दो बार युवाओं के लिए कार्यशाला आयोजित कर गुरु – शिष्य परंपरा के तहत  विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत में दीक्षित किया।  सन् 2004 में भारत सरकार ने उन्हें इस्लामाबाद में आयोजित सार्क संगीत समारोह में राजदूत बनाकर भेजा था। सन् 2005 में अपने ही शीर्षक से मीता ने फिल्म मीता- लिंकिंग अ ट्रेडिशन विथ टुडे का निर्माण प्रसार भारती और लोक सेवा प्रसारण ट्रस्ट के सहयोग से किया। उन्होंने फ्रांस और इस्लामाबाद के अलावा जर्मनी, ब्रिटेन, स्विट्जरलैण्ड, नॉर्वे, रोम, इटली, अमेरिका, रूस और बांग्लादेश में भी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी है।

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संगीत के लिए मीता कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजी जा चुकी हैं। इनमें संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान (Ustad Bismillah Khan) युवा पुरस्कार, इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार, भारत के गोल्डन वॉयस, सुर मणि, युवा ओजस्विनी, फिक्की की ओर से युवा रत्न और दिल्ली रत्न के अलावा इंडिया टुडे पत्रिका ने रायशुमारी के आधार पर उन्हें सहस्राब्दी की युवा शक्ति के रूप में चुना। उनके प्रसिद्ध अलबम में नक्शेकदम, तानसेन (म्यूजिक टुडे और सारेगमप डीवीडी प्लेयर), परंपरा- ग्वालियर (दूरदर्शन आर्काईव) प्रमुख है।

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ऑल इंडिया रेडियो की प्रथम श्रेणी कलाकार मीता को वर्ल्ड स्पेस सैटेलाइट रेडियो प्रोग्राम के शास्त्रीय संगीत श्रृंखला में स्वर श्रृंगार के नाम से पुकारा जाता है। वर्तमान में वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की परियोजना निदेशक हैं।

उपलब्धियां
1. संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार- सन् 2008
2. फिक्की युवा रत्न पुरस्कार
3. इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार
4. भारत की सुनहरी आवाज़ (गोल्डन वॉयस ऑफ इंडिया)
5. सुर मणि सम्मान
6.युवा ओजस्विनी सम्मान
7.दिल्ली रत्न सम्मान
8.इंडिया टुडे की ओर से सहस्राब्दी युवा शक्ति सम्मान

संदर्भ स्रोत – मध्यप्रदेश महिला संदर्भ 

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