अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में प्रियांशी प्रजापत को रजत

blog-img

अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में प्रियांशी प्रजापत को रजत

अल्बानिया की राजधानी तिराना में आयोजित द्वितीय रैंकिंग श्रृंखला ‘मुहामेत मालो’ अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश राज्य कुश्ती अकादमी की पूर्व खिलाड़ी प्रियांशी प्रजापत ने 50 किलोग्राम भार वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अर्जित किया। विश्व स्तरीय पहलवानों के बीच यह उपलब्धि प्रदेश के लिए गौरव का विषय बनी है। 

प्रतिष्ठित रैंकिंग प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के शीर्ष पहलवानों ने भाग लिया। प्रियांशी ने शुरुआती दौर से ही आक्रामक रणनीति, तकनीकी कौशल और मजबूत मानसिक संतुलन का परिचय दिया। लगातार जीत दर्ज करते हुए उन्होंने फाइनल तक का सफर तय किया और रजत पदक अपने नाम किया।

प्रदेश की खेल प्रतिभा को मिली वैश्विक पहचान

यह प्रतियोगिता विश्व कुश्ती कैलेंडर की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। यहां पदक जीतना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की खेल प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्ता का प्रमाण भी है। पिछले वर्षों में प्रदेश की खेल अकादमियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। प्रियांशी की सफलता उसी निरंतर प्रयास का परिणाम मानी जा रही है।

छाया : दैनिक भास्कर 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की
न्यूज़

गरीबी से सफलता तक: मध्यप्रदेश की , भगवती देवी बनीं ट्रैक्टर उद्यमी

हरदोली गांव की महिला ने दिखाया संघर्ष और आत्मनिर्भरता का रास्ता

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच'
न्यूज़

महिलाओं की संस्था 'सकारात्मक सोच' , ने बदली स्कूल और आंगनवाड़ी की तस्वीर

शिक्षा और पर्यावरण में योगदान- स्कूलों में अब वाटर कूलर, पंखे, एलईडी के साथ रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से
न्यूज़

नो केमिकल हर्बल प्रोडक्ट से बीमारियों से , सुरक्षा उज्जैन की छात्राओं का अनोखा नवाचार

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की छात्राओं ने बनाया हर्बल प्रोडक्ट, डेली यूज की चीजें, खाने पीने के सामान क...

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों
न्यूज़

मां यशोदा बनकर सैकड़ों कुपोषित बच्चों , को नई जिंदगी  दे रही रीवा की ममता

सामाजिक सेवा से मिलती है संतुष्टि - आठ साल पहले पहली बार 47 अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था।