• विभा सिंह
वह एक ज़माना था जब मध्यप्रदेश के किसी कोने से बमुश्किल कोई महिला किसी खेल के लिये जानी जाती थी। अब अनजाने से गाँव-कस्बों से लेकर शहरों की बेटियां तक खेल की लगभग हर विधा में अपना परचम लहरा रही हैं। चूल्हे-चौके की फ़िक्र, पैसे की तंगी, पड़ोसियों के ताने और समाज की तिरछी नजरें अब मायने नहीं रखते हैं। अब वे सपने को सच करना और इतिहास बन जाने का हुनर सीख गई हैं।
देश की सर्वोच्च संस्था संसद में भले ही महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण ना मिल पा रहा हो लेकिन मध्य प्रदेश में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियों में महिला खिलाड़ियों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला हुआ है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां इसका बखान कर रही हैं।
सिर्फ पिछले साल (2024-25) की ही बात करें तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 5 गोल्ड, 11 सिल्वर और 7 ब्रांज समेत महिला खिलाड़ियों की झोली में कुल 23 पदक थे। वहीं राष्ट्रीय स्तर (2024-26) पर 58 गोल्ड, 48 सिल्वर और 42 ब्रांज सहित कुल 148 मेडल अर्जित किए थे।
एशियन गेम्स 2023 में 11 महिला खिलाड़ियों द्वारा 02 स्वर्ण, 05 रजत और 03 कांस्य यानी कुल 10 पदक जीते। वहीं अगर नेशनल गेम्स 2023 गोवा की बात करें तो 22 स्वर्ण, 19 रजत एवं 22 कांस्य महिला खिलाड़ियों ने अर्जित किए थे। साफ है कि मुश्किल राह पर चलते हुए ये बेटियां अब भी पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
• महिला हॉकी खिलाड़ियों का गोल्डन पीरियड
पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश हॉकी का हब बन चुका है। यहाँ की महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाते हुए पिछले तीन सालों (2023-25) में पांच गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रांज जीता है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर 13 गोल्ड, 10 सिल्वर और चार ब्रांज अर्जित किए।
2006 में मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी की शुरूआत हुई थी। साल 2006 से लेकर 2026 तक अकादमी की 50 खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना योगदान दे चुकी हैं। प्रदेश की प्रमुख महिला हॉकी खिलाड़ियों की बात करें तो पहला नाम इशिका चौधरी का आता है।
• इशिका चौधरी : मजबूत दीवार
महिला हॉकी टीम में डिफेंडर के रूप में खेलती इशिका चौधरी का जन्म 15 अप्रैल, 2000 को ग्वालियर में हुआ। 11 साल की उम्र से हॉकी खेलने की शुरुआत करने वाली इशिका ने सब जूनियर और जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलकर अपनी पहचान बनानी शुरू की। जूनियर स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपने करियर की नींव रखी। फिटनेस और स्किल में सुधार करते हुए इसी बीच इशिका ने सीनियर टीम के लिए खुद को तैयार किया।
लेकिन उनकी जिंदगी में ब्रेकथ्रू 2022 में आया जब उन्हें सीनियर भारतीय टीम में शामिल किया गया। इसी साल टीम को वूमंस हॉकी एशिया कप में ब्रॉन्ज और उप कप्तान की ज़िम्मेदारी संभालते हुए FIH जूनियर वर्ल्ड कप 2022 में चौथा स्थान दिलाकर राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। 2023 आते-आते इशिका टीम की डिफेंस लाइन की महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गई और एशियन चैंपियन्स ट्रॉफी 2023 और 2024 में टीम को गोल्ड तक पहुंचाकर वे भारत की डिफेंस की मजबूत दीवार बन गईं।
इशिका चौधरी के अलावा मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की अनुभवी मिडफील्डर मोनिका मलिक, सुशीला चानू, बिचू देवी, अदिति महेश्वरी, प्रीति दुबे और ज्योति सिंह जैसी अनुभवी खिलाड़ी अब टीम की रीढ़ बन चुकी हैं।
• महिला क्रिकेट का टैलेंट हब
मध्यप्रदेश की महिला क्रिकेट टीम पिछले पांच सालों में तेजी से उभरी है। इस दौरान राष्ट्रीय और वूमंस प्रीमियर लीग (WPL) में कई खिलाड़ियों ने अपनी जगह बनाई। अगर हम प्रमुख महिला क्रिकेट खिलाड़ियों की बात करें तो पूजा वस्त्रकार, क्रांति गौड़, अनुष्का शर्मा, संस्कृति गुप्ता, रायला फिरदौस, कृति गौड़, अनन्या दुबे और शुचि उपाध्याय का नाम सबसे पहले आता है।
• पूजा वस्त्राकर : करियर और रिकॉर्ड
महिला क्रिकेट टीम की बबलू और छोटा हार्दिक के नाम से मशहूर पूजा वस्त्राकर का जन्म आदिवासी बहुल ज़िले शहडोल में 25 सितंबर, 1999 को हुआ। साधारण परिवार में जन्मी पूजा जब दस साल की थी तो मां का साया उठ गया। बचपन से ही क्रिकेट का शौक रखने वाली पूजा की शुरुआत गली में लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने से हुई। कुछ समय के बाद पूजा ने स्टेडियम का रुख किया जहां कोच आशुतोष श्रीवास्तव ने उसके हुनर को पहचाना और ट्रेनिंग शुरू की।
महज 14 वर्ष की उम्र में मध्यप्रदेश की सीनियर टीम में सिलेक्ट होकर बल्लेबाजी का जौहर दिखाना शुरू कर दिया। उंगली में चोट लगने के कारण वह तेज गेंदबाजी भी करने लगी। चोट और पूजा का रिश्ता आगे भी बना रहा। कम उम्र में ही उसे घुटने में गंभीर चोट लगी, जिससे उनका करियर खत्म होने को था लेकिन पूजा ने हिम्मत नहीं हारी और शानदार वापसी की।
ऑलराउंडर बनने की तरफ कदम बढ़ाती पूजा 2018 में सीनियर भारतीय टीम का हिस्सा बनी और दक्षिण अफ्रीका में वनडे और टी-20 में डेब्यू किया। यह वही साल था जब मप्र सरकार ने अपने सबसे बड़े खेल सम्मान विक्रम अवॉर्ड से पूजा को सम्मानित किया। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ 2021 में टेस्ट डेब्यू किया।
2022 में न्यूजीलैंड में आयोजित आईसीसी वूमंस क्रिकेट वर्ल्ड कप में पूजा का चयन हुआ और पहले ही मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 62 रनों की जिताऊ पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता और टूर्नामेंट में 10 विकेट लिए थे। इतना ही नहीं 2022 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 28 गेंदों में 34 रन की पारी में उन्होंने टूर्नामेंट का सबसे लंबा छक्का (81 मीटर) लगाया था।
इसी साल कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। साल 2023 में महिला टी-20 में मुंबई इंडियंस ने 1.90 करोड़ देकर पूजा को खरीदा और दूसरे साल भी उसे बनाये रखा। 2025 पूजा के लिए मुश्किल रहा क्योंकि चोट के कारण नहीं खेल पाई। फिलहाल WPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पूजा को 85 लाख रुपये में खरीदा लेकिन चोट के कारण शुरुआती मैचों से बाहर रहने के बाद उन्होंने वापसी की।
• क्रांति गौड़ : संघर्ष की कहानी
क्रांति गौड़ भारत की एक उभरती हुई महिला क्रिकेटर हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली है। छतरपुर में 11 अगस्त, 2003 को जन्मी क्रांति की शुरुआत टेनिस बॉल क्रिकेट में लड़कों के साथ खेलने से हुई और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। लेदर बॉल से पहला मैच खेलने के किस्से पर क्रांति बताती है कि वह बतौर दर्शक मैच देखने पहुंची थी लेकिन एक टीम में महिला खिलाड़ी कम होने पर टीम के कोच की तरफ से खेलने का ऑफर मिलने पर मैदान पर उतरीं। इसमें उन्होंने 25 रन बनाए और दो विकेट लिए और जब घर लौटीं तो उनके हाथ में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवार्ड था।
2025 में भारत की राष्ट्रीय टीम में प्रवेश पाने वाली क्रांति ने श्रीगणेश तो श्रीलंका से किया लेकिन पहचान इंग्लैंड दौरे से मिली। उन्होंने इस मैच में 52 रन देकर छह विकेट लिए तब उनकी उम्र महज 21 साल 345 दिन थी। वह इस उम्र में महिला वनडे में भारत की ओर से सबसे कम उम्र में पांच विकेट लेने वाली खिलाड़ी हैं। क्रांति ने यह उपलब्धि झूलन गोस्वामी के रिकॉर्ड को तोड़कर हासिल की थी। इस प्रदर्शन के बाद उन्हें वर्ल्ड कप के लिए चुना गया।
क्रांति गौड़ मध्यप्रदेश की पहली महिला क्रिकेटर हैं जो विश्व कप विजेता बनीं - वह भी महज 22 साल की उम्र में। वह बताती हैं, “उसके छोटे से गांव घुवारा में तो सब मैच देख रहे थे। जब मैच जीते तो उन्होंने पटाखे छोड़े। मैं भी इसे देखकर बहुत भावुक हुई। मैंने बहुत मुश्किलों का सामना किया है। एक समय था जब खाने के लिए हमारे पास कुछ नहीं था और आज ऐसा वक़्त है। मैंने बहुत सारे सपने देखे हैं और मैं ज़रूर पूरी करूंगी।”
अपनी बिटिया को संबल देने के लिए क्रांति की मां को गहने बेचने पड़े थे लेकिन विश्व कप जीतने के बाद पुरस्कारों की बाढ़ आ गई। क्रांति की इस उपलब्धि पर राज्य सरकार ने एक करोड़ रुपये का चेक दिया। सरकारी नौकरी का ऑफर भी मिला। छतरपुर में नए स्टेडियम बनाने का ऐलान हुआ, वहीं एक निजी कंपनी ने क्रांति को एक कार भेंट की। बेटी की बदौलत 13 साल के निलंबन के बाद पिता मुन्नालाल गौड़ को इस साल मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में बहाल कर दिया गया।
हार्दिक पांड्या को रोल मॉडल मानने वाली क्रांति गौड़ आज भारतीय महिला क्रिकेट की नई उम्मीद हैं।
• मध्यप्रदेश महिला मुक्केबाज़ों की चमक
मध्यप्रदेश की महिला बॉक्सर खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन से चमक बिखेर रही हैं। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्टार खिलाड़ी अभी कम हैं लेकिन राज्य स्तर और नेशनल चैंपियनशिप में कई खिलाड़ी उभरकर सामने आई हैं, जिनमें गोल्ड मेडलिस्ट दिव्या पवार, 2020 में विक्रम अवार्ड से सम्मानित मंजू मनोरिया, निशा जाटव और आरती यादव का नाम शामिल हैं।
इन खिलाड़ियों ने एलीट और यूथ नेशनल चैंपियनशिप और इंटरनेशनल लेवल पर पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई है। इनके अलावा उभरती खिलाड़ियों की बात करें तो राधा पाटीदार, माही लांबा और जिज्ञासा राजपूत ने भी नेशनल स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
• गोल्डन गर्ल दिव्या पवार
दिव्या पवार ने अपने गोल्डन पंच से साबित कर दिया है कि साधारण पृष्ठभूमि से भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। अपनी मजबूत पंचिंग और फिटनेस की बदौलत सर्बिया में हुए इंटरनेशनल गोल्डन ग्लव्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल तथा थाईलैंड में 2018 में खेले गए एशियन यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।
अगर उनकी राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों की बात करें तो 2025 में उत्तराखंड में हुए 38वें नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल और गोवा में हुए नेशनल गेम्स में सिल्वर मेडल का तमगा अपने नाम कर रखा है। 52-54 किलोग्राम वर्ग में विशेष दक्षता रखने वाली दिव्या 2020 में एनर्जी ड्रिंक में प्रतिबंधित पदार्थ होने की जानकारी नहीं होने के कारण डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाई गईं थीं। यह घटना उनके करियर के लिए चुनौतीपूर्ण रही लेकिन उन्होंने दमदार वापसी की।
• अंजलि सिंह : सफलता की कहानी
धार की रहने वाली अंजलि सिंह अपने छोटे से करियर में अपनी मेहनत के बलबूते अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन गई हैं। 2019 में भोपाल की बॉक्सिंग अकादमी से जुड़ीं और अपने दमदार पंच से खेलो इंडिया और नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही मार्च 2023 में यूथ वर्ल्ड कप में रजत पदक भी हासिल किया। अंजलि इस अकादमी की 64वीं खिलाड़ी हैं जिन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया है।
• मंजू बंबोरिया : बॉक्सिंग सनसनी
किसान परिवार से निकली बॉक्सिंग सनसनी मंजू बंबोरिया उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील की उभरती हुई स्टार बॉक्सर हैं। 8 साल की उम्र से बॉक्सिंग की प्रैक्टिस कर रही हैं। शुरुआत में मंजू ने तकिए में रेत भरकर अपना पंचिंग बैग बनाया था।
स्कूल चैंपियनशिप, जूनियर वर्ग और राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। 2013 में बॉक्सिंग सीखने के लिए स्पोर्ट्स क्लब ज्वाइन किया और इसी साल कोलकाता में नेशनल गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
इसके बाद 2014 में बुल्गारिया यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और 2015 में यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। 2017 में घुटने की चोट के कारण उन्हें दो वर्षों तक बॉक्सिंग से दूर रहना पड़ा।
2019 में सीनियर कैटेगरी में मंजू ने नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर वापसी की और गुवाहाटी में आयोजित इंडिया ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। उसी वर्ष, उन्होंने रूस में आयोजित विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लिया और नेपाल में आयोजित 13वें दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
मंजू ने कजाकिस्तान में आयोजित एलोर्डा कप में भाग लिया जहां सेमीफाइनल में हार के बाद उन्होंने कांस्य पदक जीता।
• तीरंदाजी में निशाना लगाती बेटियां
वैसे तो दक्षिण कोरिया की महिला तीरंदाज दुनिया में सबसे आगे हैं। भारत की बात करें तो दीपिका कुमारी और मध्यप्रदेश की सितारा खिलाड़ी मुस्कान किरार बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। 18वें एशियन गेम्स की तीरंदाजी कंपाउंड टीम इवेंट में पदक जीतकर मुस्कान ने प्रदेश में मुस्कान बिखेर दी थी। कारण, एशियन गेम्स में हॉकी छोड़कर किसी दूसरे खेल में पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश की पहली खिलाड़ी हैं।
एकलव्य और विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित मुस्कान किरार ने 2021 में विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीता था। जबलपुर की रहने वाली मुस्कान ने 2021 में ही राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के दौरान 150 में से 150 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी।
मुस्कान के अलावा जूनियर और सीनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहीं प्राची सिंह, राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक बटोर चुकीं साक्षी चौधरी, रीतू यादव, अंजलि भिलाला, कोमालिका बारी, पूनम यादव और राज्य स्तर की प्रमुख खिलाड़ी कविता किरार उभरती हुईं प्रतिभाएं हैं।
• अखाड़े से दंगल तक
भारत में कुश्ती और लड़कियां अब एक दूसरे के पर्याय बन रहे हैं, जहां विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और गीता फोगाट जैसी पहलवानों ने रूढ़ियों को तोड़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है। अब मध्यप्रदेश की बेटियां भी पारंपरिक अखाड़े से लेकर राष्ट्रीय स्तर के दंगल तक अपनी धाक जमा रही हैं। राज्य में खेल प्रोत्साहन के कारण महिला पहलवानों की संख्या और उनका स्तर दोनों बढ़ा है।
• शिवानी के दांव की दुनिया दीवानी
छिंदवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव उमरेठ की शिवानी आज दंगल गर्ल के नाम से जानी जाती हैं। मध्यप्रदेश के सर्वोच्च विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित शिवानी गांव से कुश्ती के गुर सीखकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।
2021 में सर्बिया में हुए 50 किलोग्राम भार वर्ग की अंडर-23 अंतरराष्ट्रीय महिला कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। 2024 में किर्गिस्तान में हुई एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में तीन बार की विश्व चैंपियन को पटकनी देकर कांस्य पदक जीता। वहीं कनाडा में हुए वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में स्वर्ण पदक का खिताब अपने नाम किया है।
शुरुआत में फुटबॉल और एथलेटिक्स खेलने वाली शिवानी का सपना ओलंपिक में जाकर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना था। उनकी मां पुष्पा पवार कहती हैं, “जब हमने शिवानी को कुश्ती में भेजने का फैसला किया तो समाज के ताने भी मिले। लोग कहते थे कि लड़की को कोई कुश्ती में भेजता है क्या! आज वही लोग उससे मिलना चाहते हैं।”
शिवानी की कोच प्रदेश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित और देश की इकलौती मुस्लिम महिला इंटरनेशनल खिलाड़ी फातिमा बानो रही हैं।
शिवानी के अलावा मंडला जिले की आदिवासी पहलवान चांदनी नरेटी ने मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 62 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। दूसरी ओर प्रियांशी प्रजापत और सानु सिंह भी लगातार शानदार प्रदर्शन से दबदबा बनाए हुए हैं।
• रोइंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन
भारत में रोइंग (पतवार नौकायन) अभी उभरता हुआ खेल है। वैसे तो 1900 से ही पुरुष रोअर ओलंपिक में स्पर्धा कर रहे हैं लेकिन महिलाओं की रोइंग को 1976 में शामिल किया गया। आज ओलंपिक में चौदह प्रकार की नौकाएं प्रतिस्पर्धा करती हैं।
मध्यप्रदेश की दिलजीत कौर, गुरबानी कौर और पूनम ने रोइंग को नई पहचान दी है। स्पीड और निरंतर प्रदर्शन से ये रोइंग टीम की रीढ़ बनती जा रही हैं। इन्होंने 2025 में वियतनाम में आयोजित सीनियर एशियन रोइंग चैंपियनशिप में टीम स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
वहीं अंजलि शिवहरे ने 36वें नेशनल गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल 2025 का आयोजन जम्मू-कश्मीर की डल झील में हुआ जहां मनीषा दांगी और जिज्ञासा सेंगर ने रोइंग डबल स्कल ओपन वेट में गोल्ड मेडल जीता तथा रुकमणी दांगी और संतोष ने महिला वर्ग डबल स्कल में गोल्ड मेडल जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
2025 में भोपाल के बड़े तालाब पर आयोजित 42वीं नेशनल सीनियर रोइंग चैंपियनशिप की मेजबानी के दौरान भी खिलाड़ियों ने अपना दबदबा बनाए रखा।
• पैरा खिलाड़ी प्राची यादव का सपना
पैरा कैनो स्प्रिंट में भारत की पहली महिला खिलाड़ी प्राची यादव का सपना ओलंपिक 2028 में पदक लाने का है। प्राची का जन्म 29 मई 1995 को ग्वालियर में हुआ। बचपन से खेलों के प्रति रुझान होने के चलते उन्होंने स्विमिंग शुरू की। उनकी लंबी कद-काठी को देखते हुए उनके कोच ने उन्हें कैनो स्प्रिंट खेलने की सलाह दी।
उन्होंने 2022 पैरालंपिक विश्व कप में कांस्य पदक जीता, जो पैरा कैनो में किसी भी भारतीय एथलीट द्वारा जीता गया पहला पदक था। इसके अलावा उन्होंने 2023 एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण और रजत पदक जीते तथा 2023 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित की गईं।
• इंदौर की सपना का धमाका
मध्यप्रदेश की प्रतिभाशाली पैरा ताइक्वांडो खिलाड़ी सपना शर्मा ने अपने शानदार प्रदर्शन से इतिहास रच दिया। बेंगलुरु के कोरामंगला स्टेडियम में आयोजित 4वीं पैरा ताइक्वांडो नेशनल चैंपियनशिप 2025-26 में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उन्हें लगातार हासिल हुआ चौथा नेशनल गोल्ड था। वे देश की पहली ऐसी दिव्यांग खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।
दोनों पैरों में पोलियो होने के बावजूद सपना ने कभी हार नहीं मानी। टेबल टेनिस में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने आर्म रेसलिंग में भी पदक जीता। आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने निरंतर अभ्यास जारी रखा।
सपना शर्मा का कहना है कि “मजबूत हौसलों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती है। मेरा लक्ष्य देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीतना है।”
• ब्लाइंड वर्ल्ड कप
23 नवंबर 2025, कोलंबो का मैदान। एक तरफ थी नेपाल की टीम और दूसरी तरफ थी भारत की टीम। ये मौका था ब्लाइंड टी-20 वर्ल्ड कप का। पहली बार खेले गए इस टूर्नामेंट में भारतीय महिलाओं ने न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि पूरे टूर्नामेंट में अविजित रहीं। फाइनल मुकाबले में भारतीय महिलाओं ने नेपाल को 7 विकेट से शिकस्त दी।
वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम में मध्यप्रदेश की तीन प्रमुख खिलाड़ी - नर्मदापुरम की ऑलराउंडर सुनीता सराठे, दमोह की सुषमा पटेल और बैतूल की बल्लेबाज और विकेटकीपर दुर्गा येवले थीं।
• दिव्यांग होने के बाद भी सुषमा पटेल ने अपने क्रिकेट के जुनून को कम नहीं होने दिया। नज़र कमज़ोर थी लेकिन उनका इरादा बहुत मजबूत था। बचपन में सुषमा अपने भाइयों के साथ खेतों में लकड़ी के पटिए से क्रिकेट खेलती थीं। पिता ने देखा कि उनकी बेटी को क्रिकेट में गहरी रुचि है तो उन्होंने ब्लाइंड क्रिकेट के बारे में जानकारी जुटाई। इसी समय बड़ी बहन को भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में ब्लाइंड महिला क्रिकेट का शिविर लगने की जानकारी मिली। सुषमा यहां पहुंची और शानदार प्रदर्शन किया तो मध्यप्रदेश टीम में उन्हें जगह मिल गई।
• बॉल थ्रो से जीत दिलाने वाली सुनीता सराठे ने बताया कि जब मैं बच्चों के साथ खेलती थी तो मेरे माता-पिता और परिवार के अलावा किसी का सपोर्ट नहीं मिलता था। जब से टी-20 वर्ल्ड कप जीता है तो अब लोग कहते हैं कि खूब खेलो, आगे बढ़ो।
• दुर्गा येवले के भी यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उनकी पढ़ाई बैतूल के ब्लाइंड स्कूल से हुई। जब उच्च शिक्षा और बेहतर ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजने की बात आई तो माली हालत आड़े आ गई। तब मां ने गहने गिरवी रख दिए ताकि बेटी का सपना पूरा हो। इस त्याग ने दुर्गा की किस्मत पलट दी। 2021 में इंदौर में हुए एक कैंप में दुर्गा का चयन जिला स्तरीय टीम में हुआ और फिर उनकी क्रिकेट यात्रा शुरू हो गई। विश्व कप टीम तक पहुंचने में दुर्गा ने अपनी लगन, अनुशासन और अदम्य इच्छा शक्ति से हर चुनौती को मात दी।
इन तीनों खिलाड़ियों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रदेश सरकार ने 25-25 लाख रुपये दिए। जिसमें 10-10 लाख रुपये नकद और 15-15 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में थे।
• अर्जुन पुरस्कार और विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित महिला खिलाड़ी
देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार यानी अर्जुन पुरस्कार से प्रदेश की 8 खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा चुका है। इनमें स्व. सुनीता चंद्रा, सुषमा सरोलकर, नीलिमा सरोलकर, संध्या अग्रवाल, मधु यादव, राजकुमारी डोडिया, प्राची यादव और रूबीना फ्रांसिस शामिल हैं।
वहीं प्रदेश के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को प्रतिवर्ष 12 विक्रम अवॉर्ड दिए जाते हैं। पिछले तीन वर्षों में 22 महिला खिलाड़ियों को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
• महिला क्रिकेटरों के लिए पेंशन योजना
महिला खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मध्यप्रदेश क्रिकेट संघ (MPCA) ने इस साल बड़ा फैसला किया है। 1 अप्रैल 2026 से एमपीसीए ने राज्य की पूर्व महिला क्रिकेटरों को मासिक पेंशन देने की योजना शुरू की है।
पेंशन की राशि 6 हजार रुपये से 12,000 रुपये तक होगी। जिन महिला खिलाड़ियों को बीसीसीआई की तरफ से पेंशन नहीं मिल रही है, वे ही इस योजना की पात्र होंगी।
2025 वह साल रहा है जहां हर मोर्चे पर महिलाओं ने एक बार फिर साबित किया कि वे किसी से कम नहीं हैं। ब्लाइंड क्रिकेट ने तो महिला खिलाड़ियों को नई राह और बड़े बदलाव की अलख जलाई है। चुनौतियों के बावजूद इनके उत्कृष्ट प्रदर्शन यह बताते हैं कि सीमाएं केवल सोच में होती हैं, क्षमता में नहीं।
सन्दर्भ स्रोत : खेल विभाग से प्राप्त आंकड़ें, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबसाइटों से एकत्र जानकारी पर आधारित



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