नसबंदी फेल होने पर मप्र हाईकोर्ट : महिला को छह

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नसबंदी फेल होने पर मप्र हाईकोर्ट : महिला को छह
प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा मुआवजा

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने नसबंदी ऑपरेशन विफल होने के मामले में भिंड जिले की एक महिला को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना 2013 के तहत महिला मुआवजे की हकदार है और केवल देरी के आधार पर उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने की। 

2013 में कराया था नसबंदी ऑपरेशन

याचिकाकर्ता महिला की ओर से अदालत को बताया गया कि उसने 29 नवंबर 2013 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोहद में नसबंदी ऑपरेशन कराया था। इसके बावजूद वह बाद में गर्भवती हो गई और 4 अगस्त 2015 को उसने एक पुत्र को जन्म दिया। महिला ने इसे नसबंदी प्रक्रिया की विफलता बताते हुए परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना 2013 के तहत मुआवजे की मांग की थी।

अधिकारियों को दिए कई आवेदन 

महिला की ओर से कहा गया कि उसने संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार आवेदन प्रस्तुत किए। साथ ही 25 जून 2019 को जरूरी दस्तावेजों के साथ प्रतिनिधित्व भी दिया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में दो लाख रुपये मुआवजा देने और बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी राज्य शासन को सौंपने की मांग भी की गई थी। 

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राज्य शासन ने किया विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया कि केवल नसबंदी विफल होने से अधिक मुआवजा देने का अधिकार स्वतः नहीं बनता। साथ ही यह भी कहा गया कि महिला ने काफी देरी से दावा पेश किया है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा that इस मुद्दे पर पहले भी खंडपीठ स्पष्ट कर चुकी है कि परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना एक लाभकारी योजना है और केवल देरी के आधार पर पात्र व्यक्ति को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने माना कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि महिला ने नसबंदी ऑपरेशन कराया था और उसके बाद बच्चे को जन्म दिया, जिससे नसबंदी विफल होने का तथ्य स्थापित होता है।

30 हजार रुपये मुआवजे का आदेश

कोर्ट ने कहा कि योजना के तहत ऐसे मामलों में 30 हजार रुपये का मुआवजा निर्धारित है। हालांकि अदालत ने दो लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा और बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी राज्य शासन पर डालने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिट क्षेत्राधिकार में योजना से अधिक राहत नहीं दी जा सकती।

ब्याज सहित मिलेगा भुगतान

हाई कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिया कि महिला को 30 हजार रुपये का मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दिया जाए। यह ब्याज 25 जून 2019 को दिए गए आवेदन की तारीख से वास्तविक भुगतान तक देय होगा।

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