नई दिल्ली: Delhi High Court ने एक अहम फैसले में कहा है कि शादी के बाद महिला को दहेज में छोटी गाड़ी और कम सोना लाने को लेकर बार-बार ताने देना भी मानसिक क्रूरता माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे तानों को मामूली घरेलू विवाद कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली की एक महिला की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। शादी के एक साल के भीतर महिला अपने ससुराल की छत से गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद महिला के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी को पति और ससुराल पक्ष के लोग लगातार दहेज को लेकर परेशान करते थे।
परिवार के अनुसार, पति अक्सर ताना मारता था कि “तुम्हारे पिता ने बड़ी गाड़ी देने का वादा किया था, लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए। सोना भी कम दिया।”
कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Justice Swarana Kanta Sharma ने कहा कि पहली नजर में यह मामला दहेज प्रताड़ना का प्रतीत होता है। कोर्ट ने माना कि महिला को बार-बार दहेज को लेकर ताने देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्यवहार के आधार पर पति के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।
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दहेज हत्या का आरोप क्यों नहीं बहाल हुआ?
हालांकि, कोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप को बहाल नहीं किया। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार यह साबित होना जरूरी है कि महिला को मौत से ठीक पहले दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था। रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला।
ट्रायल कोर्ट की दलील को हाई कोर्ट ने माना गलत
ट्रायल कोर्ट ने पहले पति को राहत देते हुए कहा था कि वह पहले से विधुर था और अपने दो छोटे बच्चों की देखभाल के लिए दूसरी शादी की थी। इसलिए उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का कोई कारण नहीं बनता।
लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि दूसरी शादी की वजह चाहे जो भी हो, इससे दहेज उत्पीड़न के आरोप स्वतः झूठे साबित नहीं हो जाते।
अब हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि पति के खिलाफ धारा 498A IPC के तहत आरोप तय कर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जाए।



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