खुद का दर्द भुलाकर मरीजों के चेहरे पर मुस्कान

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खुद का दर्द भुलाकर मरीजों के चेहरे पर मुस्कान
बिखेरती ग्वालियर जयारोग्य अस्पताल की नर्सें

ग्वालियर जयारोग्य अस्पताल में काम करने वाली तीन नर्सें, जो खुद कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही हैं, आज दूसरों के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं। इन नर्सों ने अपने जीवन के सबसे कठिन समय में भी अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दी और अपने मरीजों को ना केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक समर्थन भी प्रदान किया।

राखी श्रीवास्तव: कैंसर से जूझते हुए मरीजों को हिम्मत

राखी श्रीवास्तव, जो ब्लड कैंसर से जूझ रही हैं, आईसीयू में ड्यूटी करती हैं और मरीजों को अपने जीवन से प्रेरणा देती हैं। राखी कहती हैं, "जब मरीज अपने कैंसर से जूझ रहे होते हैं, तो मैं उन्हें दिखाती हूं कि मैं भी इस बीमारी से लड़ रही हूं, और मैं काम कर रही हूं। इससे उन्हें हिम्मत मिलती है।"

प्रेमलता माथनकर: कैंसर से दो बार जूझने वाली नर्स

प्रेमलता माथनकर जो ब्रेस्ट और लंग्स कैंसर से दो बार जूझ चुकी हैं, वे 14 वर्षों से जयारोग्य अस्पताल में काम कर रही हैं और कहते हैं, "कभी भी अपनी बीमारी को अपने काम के आड़े नहीं आने दिया।" उन्होंने हमेशा मरीजों के इलाज को अपनी प्राथमिकता माना, और इलाज के दौरान भी ड्यूटी पर आईं।

 

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सुनीता डोगरे: रोमेटाइड आर्थ्राइटिस के बावजूद ड्यूटी निभाना

सुनीता डोगरे, जो 12 वर्षों से रोमेटाइड आर्थ्राइटिस से जूझ रही हैं, अपने दर्द को सहते हुए भी अस्पताल में अपनी ड्यूटी करती हैं। वे कहती हैं, "शरीर में दर्द है, लेकिन अगर हम काम नहीं करेंगे तो दर्द और बढ़ेगा।" उनका मानना है कि जीवन में कुछ अच्छा करना चाहिए और किसी की सेवा करना उनका उद्देश्य है।

नर्सों का संघर्ष: परिवार के समर्थन और ईश्वर पर विश्वास

इन नर्सों के परिवारों ने भी उनका साथ दिया, और हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। राखी और प्रेमलता दोनों ने बताया कि उनके परिवार ने कभी भी उनका साथ छोड़ने की बात नहीं की, और वे हमेशा अपने इलाज को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए अपनी ड्यूटी निभाती हैं। ग्वालियर जयारोग्य अस्पताल में इन नर्सों का योगदान अनमोल है। उनका समर्पण और साहस न केवल उनकी अपनी बीमारी से जूझने का है, बल्कि वे मरीजों के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी हैं।

सन्दर्भ स्रोत/छाया : ईटीवी भारत

सम्पादन : मीडियाटिक

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