छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : बचपन से खिलवाड़ में माफी

blog-img

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : बचपन से खिलवाड़ में माफी
नहीं, नाबालिग से रेप में हाईकोर्ट की सख्ती

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में एक अहम फैसाला दिया है। कोर्ट ने 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म बलात्कार के मामले में आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की डिवीजन बेंच ने फैसले में कहा कि, बचपन से खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं हो सकती। कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता की गवाही को स्टर्लिंग विटनेस (sterling witness) अर्थात विश्वसनीय गवाह मानते हुए विशेष अदालत के निर्णय को पूरी तरह उचित ठहराया। 

कोर्ट ने इसलिए कहा स्टर्लिंग विटनेस 

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी पीड़िताएं जो बिना दबाव के स्पष्ट, सटीक और विरोधाभास रहित गवाही देती हैं, उन्हें स्टर्लिंग विटनेस अर्थात विश्वसनीय गवाह कहा जाता है। ऐसे मामलों में किसी अन्य गवाह या अतिरिक्त सबूत की जरूरत नहीं होती। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, बाल यौन शोषण केवल पीड़िता पर नहीं, बल्कि मानवता और समाज पर हमला है। ऐसे अपराधों में कोई रहम नहीं दिखाया जा सकता। पाक्सो एक्ट बच्चों की सुरक्षा के लिए बना है। 

यह है पूरा मामला 

29 जून 2020 की शाम सरगुजा जिले के अंबिकापुर की 14 वर्षीय बच्ची अपनी दो सहेलियों के साथ टहलने निकली थी। तभी आरोपी राजू यादव उसे बहला-फुसलाकर कच्हार के जंगल में ले गया। पूरी रात उसे वहीं रखा और दुष्कर्म किया। सुबह आरोपी ने अपने दो साथियों को बुलाया और बच्ची को उनके हवाले कर फरार हो गया। बच्ची किसी तरह घर पहुंची और स्वजनों को आपबीती सुनाई। पिता ने उसी दिन थाने में शिकायत दर्ज कराई। 

सबूत और मेडिकल रिपोर्ट ने साबित किया अपराध 

स्कूल के दस्तावेजों व माता-पिता के बयान से बच्ची की उम्र 14 साल 5 महीने साबित हुई। मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर चोट नहीं मिली, लेकिन स्लाइड जांच में मानव शुक्राणु पाए गए। पीड़िता की गवाही निरंतर, स्पष्ट और विश्वसनीय पाई गई। आरोपी यौन संबंध बनाने में सक्षम पाया गया। इस पर कोर्ट ने कहा, कि, जबरदस्ती का मतलब हर बार चोट नहीं होती, पीड़िता की मानसिक स्थिति और बयान ही काफी हैं।

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



दिल्ली हाईकोर्ट :  पत्नी से परिवार की
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट :  पत्नी से परिवार की , देखभाल करने को कहना अपराध नहीं

यह मामला उस शिकायत से जुड़ा था जिसमें पत्नी ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ धारा 498A IPC, धारा 406 IPC और घरेलू हिंसा अ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट : पत्नी के पास अलग रहने
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : पत्नी के पास अलग रहने , के पर्याप्त कारण, तो गुजारा-भत्ता की हकदार

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि पति और पत्नी के बीच लंबे समय से मुकदमेबाजी चल रही है, जिसमें दहेज उत्पीड़न...

मप्र हाईकोर्ट : 13 साल का रिश्ता है, इसलिए रेप असंभव
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : 13 साल का रिश्ता है, इसलिए रेप असंभव

हाईकोर्ट ने 'आपसी सहमति' बताकर रद्द की लेफ्टिनेंट कर्नल पर हुई FIR

कलकत्ता हाईकोर्ट : पति की नौकरी खतरे में डालना भी क्रूरता
अदालती फैसले

कलकत्ता हाईकोर्ट : पति की नौकरी खतरे में डालना भी क्रूरता

सीआईएसएफ जवान मामले में कोर्ट ने पत्नी के दावे विरोधाभासी पाए

मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार की अर्जी
अदालती फैसले

मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार की अर्जी , पर सुप्रीम कोर्ट  : बराबरी का एक रास्ता UCC भी

CJI ने चिंता जताते हुए कहा कि सुधार की जल्दबाज़ी में कहीं ऐसा न हो कि हम मुस्लिम महिलाओं को मौजूदा अधिकारों से भी वंचित...

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट  : आदिवासी भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में
अदालती फैसले

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट  : आदिवासी भी हिंदू मैरिज एक्ट के दायरे में

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया और एक आदिवासी समुदाय के व्यक्ति के साथ अनुसूचित जाति की महिला के तल...