छाया: आकाशवाणी ग्वालियर के फेसबुक अकाउंट से
• शौक को जिंदा रखा, अब हुनर को मिल रही पहचान
• तानसेन कला वीथिका में लगी चित्रकला प्रदर्शनी
ग्वालियर। सीखना एक प्रक्रिया है, जो जीवन भर अनवरत चलती रहती है। हम अपनी रुचि का काम उम्र के किसी भी पड़ाव पर सीख सकते हैं। यह कर दिखाया है ग्वालियर की राजबाला अरोरा ने। उम्र के जिस पड़ाव पर आकर लोग घर में रहकर आराम करते हैं, उस उम्र में राजबाला ने न सिर्फ पेंटिंग करना सीखा, बल्कि अपने इस हुनर से उन्हें पहचान भी मिल रही है। उन्होंने गृहस्थी संभालते हुए भी अपनी पढ़ाई पूरी की, विभिन्न सेवा कार्य किए और चित्रकला में विधिवत शिक्षित हुईं।
अब 68 वर्षीय राजबाला की कला का प्रदर्शन पड़ाव स्थित कला वीथिका में एमएमबी कॉलेज के चित्रकला विभाग की तीन दिवसीय प्रदर्शनी प्रथमा में किया गया है। राजबाला एमएलबी कॉलेज से जुड़ी हैं और एमए फाइन आर्ट की छात्रा हैं। प्रदर्शनी में एमए अंतिम वर्ष और बीए फाइनल ईयर के 9 विद्यार्थियों की 54 पेंटिंग का प्रदर्शन किया जा रहा है।
बता दें कि राजबाला के पति सुभाष अरोरा स्वयं एक मूर्तिकार हैं। सेवानिवृत्ति होने के बाद दोनों ने अपनी रुचियों पर काम शुरू किया। जन सम्पर्क से रिटायर्ड सुभाष चंद्र ने रिटायरमेंट के बाद फाइन आर्ट कॉलेज से मूर्तिकला में डिप्लोमा किया और राजबाला ने पेंटिंग में। आज वे अपने हुनर के माध्यम से पहचान बना रहे हैं। सुभाष थ्री डायमेंशनल मूर्ति बनाते हैं, जिसे तीन तरफ से देखा जा सकता है, वहीं राजबाला नारियों पर आधारित पेंटिंग बनाती हैं।
• प्रदर्शनी में इनकी कला भी प्रदर्शित
प्रदर्शनी में राजबाला के अलावा एमए अंतिम वर्ष की छात्रा आकांक्षा जैन, अजान अयूब, गीतांजलि बाथम, रागिनी राय सहित अन्य विद्यार्थियों की कला का प्रदर्शन किया गया है। विद्यार्थियों ने प्रकृति की सुंदरता के साथ अमूर्त, प्रतीकात्मक, लैंड स्केप, स्टील लाइफ, पोट्रेट सहित आदि की कला प्रदर्शित की है। अधिकतर पेंटिंग एक्रेलिक, वाटर कलर और ऑयल पेंट से बनाई हैं।
संदर्भ स्रोत: पत्रिका
संपादन: मीडियाटिक डेस्क



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