खुद के जीवन पर लिखी किताब, जिसे मिला ‘द गोल्डन बुक अवार्ड’

blog-img

खुद के जीवन पर लिखी किताब, जिसे मिला ‘द गोल्डन बुक अवार्ड’

छाया: गरिमा प्रधान के फेसबुक अकाउंट से 

• 9वीं में कलाम साहब ने कहा था- बड़ी राइटर बनोगी

भोपाल की यंग राइटर गरिमा प्रधान के पहले नॉवेल ‘ए गर्ल दैट हेड टू बी स्ट्रॉन्ग’ को इंटरनेशनल लिटरेरी अवॉर्ड ‘द गोल्डन बुक अवॉर्ड’ से नवाजा जाएगा। यह फिक्शन, नॉन फिक्शन पोएट्री, नॉवेल और लिटरेरी फील्ड में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित अवॉर्ड है, जो इंटरनेशनल पब्लिकेशन हाउस विंग्स पब्लिकेशन देता है। इस साल यह अवॉर्ड दुनिया भर के 150 राइटर्स को दिया जाएगा इसमें दीपक चोपड़ा, अशनीर ग्रोवर, जेके रोलिंग, गौर गोपाल दास, रस्किन बॉण्ड, दीप्ति नवल व गीता पिरामल जैसे नामी लेखकों और हस्तियों के नाम भी शामिल हैं। दो लाख लोगों ने विंग्स पब्लिकेशन में एंट्री भेजी थी। 750 शॉर्ट लिस्ट हुए। इनमें से 150 लोगों को इस अवार्ड के लिए चुना है। अवॉर्ड सेरेमनी मार्च में दुबई में होगी।

भोपाल में जन्मी और पली-बढ़ी गरिमा ने 24 वर्ष की उम्र से लिखना शुरू किया. गरिमा उन लोगों में शुमार हैं, जो कई बार असफल होते हैं, संघर्ष करते हैं, लेकिन सफलता की तलाश में लगे  रहते हैं। इसी तरह गरिमा भी अपना लक्ष्य का पीछा करती रहीं और आखिरकार उनकी बेहतरीन लेखन शैली ने उन्हें एक दिन लेखक बना दिया।

गरिमा ने तीसरी तक की शिक्षा डेमोंस्ट्रेशन (डीएमएस) स्कूल से प्राप्त की। यहां पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ खेलों में सक्रिय रूप से भाग लेकर कई पदक जीते। यहाँ उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। आगे की पढ़ाई उन्होंने स्कूली शिक्षा सेंट जोसेफ को-एड से पूरी की। 12वीं में उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ कलाकार पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

गरिमा बताती हैं जब वे भोपाल सेंट जोसेफ कोएड स्कूल में 9वीं की स्टूडेंट थी, तब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम चीफ गेस्ट बनकर आए। उस समय उन्होंने अपनी मम्मी के लिए एक कविता ‘मदर’ लिखी थी, जो उन्होंने कलाम साहब को दिखाई। कलाम साहब ने उनकी कविता पढ़ने के बाद कहा कि एक दिन तुम बहुत अच्छी राइटर बनोगी। वहीं से उन्हें लिखने की प्रेरणा मिली। गरिमा बताती हैं कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई के साथ सीए की तैयारी में लग गईं। 3 अटैंप्ट के बाद जब वे क्लियर नहीं कर पाई तो पहचान वालों ने ताने भी दिए। इसके बाद एमबीए करके अच्छे पैकेज पर एक वर्ष नौकरी की। फिर कंटेंट राइटर के रूप में कॅरियर बढ़ाया। काफी पहचान मिली। तब लगा कि मुझे खुद की जर्नी लिखनी चाहिए।

उनका पहला उपन्यास वर्ष 2017 में आया जिसका नाम था ‘ए गर्ल दैट हैड टू बी स्ट्रॉन्ग’। यह पुस्तक उन्होंने लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने और सभी को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करने के लिए लिखी है। ‘ए गर्ल दैट हेड टू बी स्ट्रॉन्ग’ एक ऐसी लड़की ‘अद्विका’ की कहानी है, जिसकी जिंदगी में बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं और कैसे असफलता के बाद उसे सफलता मिलती है। यह गरिमा की ही कहानी है, जिसे उन्होंने नावेल में उतारा है। यह उपन्यास लिखने में उन्हें 3 महीने लगे। वर्ष 2019 में ‘ब्रोकन इज द न्यू ब्यूटीफुल’ नाम से उनकी दूसरी पुस्तक प्रकाशित हुई।

सन्दर्भ स्रोत – दैनिक भास्कर/ ऑथर गरिमा प्रधान डॉट वर्डप्रेस डॉट कॉम

संपादन – मीडियाटिक

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



 रतलाम की बबली ने दिव्यांगता को
न्यूज़

 रतलाम की बबली ने दिव्यांगता को , ताकत बनाकर हासिल किया मुकाम

तीन उंगलियों से रच दिया इतिहास: गंभीर बनीं देश की मशहूर ब्यूटीशियन, rष्ट्रपति पुरस्कार और देश की 100 प्रभावशाली महिलाओं...

सेवा और समर्पण की मिसाल: पन्ना की डॉ. दुर्गा
न्यूज़

सेवा और समर्पण की मिसाल: पन्ना की डॉ. दुर्गा

दुर्गा-ने-बेसहारा-वृद्धों-की-सेवा-करने-और-नशे-की-लत-से-पीड़ित-लोगों-को-नई-राह-व-बेहतर-जीवन-देने-की-जिम्मेदारी-अपने-हाथों...

छतरपुर की 3 महिला सरपंच राष्ट्रीय
न्यूज़

छतरपुर की 3 महिला सरपंच राष्ट्रीय , मंच पर साझा करेंगी सफलता की कहानी

प्रेजेंटेशन देने दिल्ली में आमंत्रित छतरपुर जिले की 15 ग्राम पंचायतों में किये महिला व बालिका हितैषी उल्लेखनीय कार्य.

मिनी ब्राज़ील से उभरी नई फुटबॉल स्टार सानिया कुंडे
न्यूज़

मिनी ब्राज़ील से उभरी नई फुटबॉल स्टार सानिया कुंडे

15 साल की उम्र में तीन नेशनल टूर्नामेंट खेल चुकी हैं सानिया,जर्मनी तक बजा डंका

आदिवासी छात्राओं की सेहत संवार रहीं डा. मेनका
न्यूज़

आदिवासी छात्राओं की सेहत संवार रहीं डा. मेनका

एनीमिया और थैलेसीमिया के खिलाफ अभियान, बालिकाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

न्यायपालिका में बढ़े महिलाओं का
न्यूज़

न्यायपालिका में बढ़े महिलाओं का , प्रतिनिधित्व : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत 

कहा- महिलाएं किसी प्रकार की रियायत नहीं चाहतीं, बल्कि उन्हें न्यायपू्र्ण और उचित प्रतिनिधित्व चाहिए