पढ़ाई बंद हो जाने से निराश बच्चों के लिए उम्मीद बन कर आई अर्शी

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पढ़ाई बंद हो जाने से निराश बच्चों के लिए उम्मीद बन कर आई अर्शी

छाया: फेसबुक 

भोपाल के ऐशबाग इलाके की हिनोतिया बस्ती में दो साल पहले एक संस्था द्वारा बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए काम शुरू किया गया था, जिसके  बीच में ही बंद हो जाने से बच्चे पुरानी स्थिति में आ गए थे। उनके माँ-बाप उन्हें पढ़ाना चाहते थे और बच्चे खुद भी पढ़ना चाहते थे। इसके मद्देनजर माता-पिता और बच्चे शिक्षिका अर्शी कुरैशी के घर गए और पढ़ाई दोबारा शुरू करवाने का आग्रह किया। अर्शी ने ख़ुशी-ख़ुशी यह ज़िम्मेदारी स्वीकार की और कुछ बच्चों का दाखिला स्कूल में भी करवा दिया। इतना ही नहीं अब वे लाइब्रेरी बनाने के लिए प्रयास कर रही हैं। जगन्नाथ कॉलोनी निवासी शिक्षिका अर्शी कुरेशी पहले ही  हिनोतिया बस्ती में एक संस्था के साथ जुड़कर 2017 से मजदूरों के और पन्नी बीनने वाले बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही थीं। जिसमें 3 से लेकर 18 साल तक के 30 से ज्यादा बच्चे शामिल थे। लेकिन 2020 में संस्था का कार्यकाल पूरा होने के कारण बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया गया। इससे बस्ती में रहने वाले परिवार निराश हो गए। उन्होंने अर्शी से बच्चों को फिर से पढ़ाने की गुहार लगाई। इस पर अर्शी ने इन बच्चों को दोबारा पढ़ाना शुरू कर दिया। अभी अर्शी बस्ती के 60 बच्चों को शिक्षा दे रहे रही हैं। अर्शी ने इन बच्चों के लिए सोशल मीडिया के साथ ही दोस्तों से कॉपी-किताब-पेंसिल के लिए गुहार लगाई तो सबने उनका साथ दिया और अपने-अपने सामर्थ्य के मुताबिक पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध करा दी।

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अर्शी ने इन बच्चों के लिए स्कूल से जोड़ो अभियान शुरू किया है, जिसमें अभी तक 10 से अधिक बच्चों को नजदीक के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जा चुका है। इसके साथ ही वे लाइब्रेरी बनाने के लिए लोगों से किताब-कॉपी एवं पेंसिल-पेन देने की अपील भी कर रही हैं। वे कहती हैं कि शहर की बस्तियों में आज भी कई ऐसे बच्चे हैं, जिनके मां-बाप मजदूरी करने जाते हैं और ये बच्चे इधर-उधर भटककर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। सामाजिक सरोकार से दूर होते जा रहे इन बच्चों को अच्छी शिक्षा से जोड़ने के लिए एक अभियान चलाया है, जिसमें बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के साथ लाइब्रेरी बनाने की कवायद भी की जा रही है। इसके साथ ही मैं 60 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा भी दे रही हूं।

संदर्भ स्रोत : डीबी स्टार,

संपादन : मीडियाटिक डेस्क 

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