कभी एक सामान्य गृहिणी रहीं पल्लवी व्यास ने जीवन के सबसे बड़े दुख को अपनी ताकत बनाकर यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की नींव बन सकती हैं। सास की कैंसर से मौत के बाद उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिसने न केवल उनकी जिंदगी बदली, बल्कि सैकड़ों परिवारों तक शुद्ध और केमिकल-फ्री डेयरी उत्पाद पहुंचाने का रास्ता भी खोला।
राजस्थान से इंदौर तक का सफर
मूल रूप से ब्यावर (जिला अजमेर) की रहने वाली पल्लवी की शादी चित्तौड़गढ़ के संजय व्यास से हुई। परिवार लंबे समय से इंदौर में रह रहा है। उनके पति इंदौर हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। साल 2009 में परिवार की जिंदगी ने अचानक करवट ली, जब उनकी सास शांता को कैंसर होने का पता चला। करीब एक वर्ष तक इलाज चला, लेकिन 2010 में उनका निधन हो गया। इस घटना ने पल्लवी को भीतर तक झकझोर दिया।
बीमारी की वजह ने बदली सोच
सास के निधन के बाद पल्लवी ने डॉक्टरों से बीमारी की असल वजह जानने की कोशिश की। उन्हें बताया गया कि लंबे समय तक रसायन और कीटनाशकयुक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। बस यहीं से उन्होंने संकल्प लिया कि अब वे लोगों तक शुद्ध और रसायन-मुक्त खाद्य उत्पाद पहुंचाने का काम करेंगी।
छह गायों से शुरू हुआ ‘शांता फार्म्स’
2016 में उन्होंने सास की स्मृति में शांता फार्म्स की शुरुआत की। डेयरी खोलने के लिए ऐसी जमीन की तलाश की गई, जहां कभी रासायनिक खेती न हुई हो। काफी खोजबीन के बाद इंदौर से लगभग 70 किलोमीटर दूर करही और महेश्वर के बीच उपयुक्त जमीन खरीदी गई।
शुरुआत मात्र छह गायों से हुई थी। आज यहां 250 से अधिक गायें हैं और पूरा डेयरी संचालन अत्याधुनिक तकनीक से होता है। दूध उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक की प्रक्रिया लगभग मानव-रहित है। गायों के गले में विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो उनकी सेहत, खानपान और गतिविधियों पर नजर रखते हैं। यदि कोई गाय कम चारा या पानी लेती है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट देता है।
2000 किसानों से जुड़ा नेटवर्क
आज शांता फार्म्स से करीब 2000 किसान जुड़े हुए हैं, जो जैविक खेती करते हैं। उनके उत्पादों की मार्केटिंग में फार्म मदद करता है। डेयरी के दूध और घी की सप्लाई इंदौर के लगभग 700 घरों में नियमित रूप से की जाती है। कुछ उत्पादों का निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका तक भी हो रहा है।
5 करोड़ का सालाना टर्नओवर
लगातार मेहनत और गुणवत्ता पर फोकस का नतीजा है कि आज इस उद्यम का सालाना टर्नओवर लगभग 5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। एक गृहिणी से सफल उद्यमी बनीं पल्लवी आज न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि समाज में शुद्ध और सुरक्षित भोजन की जागरूकता भी फैला रही हैं।
सन्दर्भ स्रोत/छाया : विभिन्न वेबसाइट
संपादन : मीडियाटिक डेस्क



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