मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के निंबोल गांव की पांच महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसला मजबूत हो तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल सकती है। इन महिलाओं ने सिर्फ ₹40,000 से ‘दीदी कैफे’ की शुरुआत की और आज यही कैफे उन्हें हर साल 5 से 6 लाख रुपये की कमाई दे रहा है।
स्वयं सहायता समूह से मिली प्रेरणा
यह पहल स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद शुरू हुई। पहले ये महिलाएं केवल घर के काम तक सीमित थीं, लेकिन प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। खुशबू तिवारी ने चार अन्य महिलाओं को साथ जोड़ा और सभी ने मिलकर पूंजी इकट्ठा की। सभी महिलाओं ने थोड़े-थोड़े पैसे जमा किए और कुल ₹40,000 की राशि से ‘दीदी कैफे’ की नींव रखी। पिछले पांच वर्षों से ये महिलाएं मिलकर कैफे का संचालन कर रही हैं, जहां स्वादिष्ट और शुद्ध शाकाहारी भोजन तैयार किया जाता है।
शुरुआत में नहीं थे ग्राहक
शुरुआती समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कई दिनों तक एक भी ग्राहक नहीं आता था, लेकिन महिलाओं ने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और धैर्य के चलते धीरे-धीरे लोगों को उनके खाने का स्वाद पसंद आने लगा। समय के साथ दीदी कैफ इलाके में लोकप्रिय हो गया। अब यहां रोजाना अच्छी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं और महिलाओं की मेहनत रंग ला रही है। अब इन महिलाओं को सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में भी खाना बनाने के ऑर्डर मिलने लगे हैं। इसके अलावा त्योहारों के दौरान ये महिलाएं मिठाइयां भी तैयार करती हैं, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होती है।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
निंबोल गांव की इन महिलाओं की सफलता अब आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन चुकी है। कई महिलाएं इनसे प्रेरणा लेकर अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
सन्दर्भ स्रोत : न्यूज 18 डॉट कॉम
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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