दिल्ली हाईकोर्ट : लड़की संग दोस्ती

blog-img

दिल्ली हाईकोर्ट : लड़की संग दोस्ती
जबर्दस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में एक आरोपित की नियमित जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि वैलेंटाइन-डे पर किसी लड़की का किसी लड़के से दोस्ती करना, उसके साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं देता है।

न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि यहां तक कि लड़की की मांग में उसकी सहमति के बिना सिंदूर लगाना भी उचित नहीं ठहराया जा सकता, भले ही यह कानून में निर्धारित अपराध न हो। उक्त टिप्पणी के साथ अदालत ने आरोपित वसीम अख्तर की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। स्वजन की शिकायत पर पुलिस ने करावल नगर थाने में फरवरी 2025 में प्राथमिकी हुई थीञ आरोपित के खिलाफ फरवरी 2025 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) -की धारा 64(एक) और 137(दो) और पाक्सो अधिनियम की धारा- चार के तहत प्राथमिकी की गई थी। 

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका विरोध करते हुए अदालत को बताया था कि 17 साल की लड़की का बयान दर्ज कराया गया था। इसमें उसने आरोप लगाया था कि वह आरोपित को करीब एक साल से जानती थी। 

आरोपी ने लड़की के मांग में जबरदस्ती सिंदूर भरा 

14 फरवरी 2025 को आरोपित ने उसे बहाने से घर पर बुलाया और उसकी मांग में सिंदूर भरा और उसके विरोध के बावजूद उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इस घटना के बाद पीड़िता के भाई ने पुलिस को सूचना दी और उसका पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया। वहीं, आरोपित के अधिवक्ता ने तक दिया कि पीड़िता की उम्र 18 साल से ज्यादा थी और उसने आपसी सहमति से संबंध बनाए थे। यह भी तर्क दिया गया कि यह घटना वैलेंटाइन डे के दिन हुई थी और इससे एक प्रेम संबंध के पहलू होने का संकेत मिलता है। 

लड़की ने खुद को कोर्ट में नाबालिग साबित किया 

जबकि जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता और उसके भाई ने ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष का समर्थन किया है और पीड़िता खुद जमानत का विरोध करने के लिए कोर्ट में पेश हुई थी। यह भी कहा कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 14 जनवरी 2008 थी और उसका नाबालिग होना साबित होता है। उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता ने भी जमानत याचिका का विरोध किया और अदालत में मौजूद रही है। उक्त तथ्यों को देखते हुए आरोपित को जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी को मुकदमे के अंतिम चरण में किसी भी पक्ष के प्रतिकूल नहीं माना जाएगा।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी , शादी, फिर भी महिला को मिलेगा भरण-पोषण

हाईकोर्ट ने विवादित दूसरी शादी मामले में महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख
अदालती फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख , गुजारा भत्ता के बाद भी केस लड़ना उत्पीड़न

कोर्ट ने बुजुर्ग दंपति को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को खारिज कर दिया है।

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से
अदालती फैसले

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से , बड़ा झटका, महिला और बेटे को देना होगा भरण-पोषण

डीएनए टेस्ट से इन्कार करने वाले शिक्षक को हाई कोर्ट ने महिला और बच्चे को भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता , बच्चे के अधिकार नहीं छीन सकता

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के आपसी समझौते से बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार खत्म नहीं हो सकते। अदालत ने गुजारा भत्...

सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है , लिंग चयन, जांच कानून सख्त हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिंग चयन जैसी अवैध प्रथाएं अब भी जारी हैं। कोर्ट ने कहा- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं जर...

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला , टीचर्स को भी मिलेगी चाइल्ड केयर लीव

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल की महिला शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया