मध्यप्रदेश के रतलाम की बेटी दीपांशी जैन ने कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने छत्तीसगढ़ सिविल जज (कनिष्ठ श्रेणी) परीक्षा 2024 में पहले ही प्रयास में 12वीं रैंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है।
12वीं के बाद तय किया लक्ष्य
दीपांशी ने बताया कि उन्होंने कक्षा 12वीं के बाद ही न्यायिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी पढ़ाई की दिशा स्पष्ट रखी। इसी उद्देश्य से उन्होंने इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ़ लॉ में प्रवेश लिया, जहां ग्रेजुएशन के साथ ही सिविल जज परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उनकी मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में चयन की सूचना मिली।
पिता से मिली प्रेरणा
दीपांशी ने बताया कि उनके पिता दीपक जैन लॉ ग्रेजुएट हैं। उनसे प्रेरित होकर उन्होंने न्यायाधीश बनने का सपना देखा। इस पूरे सफर में दादा-दादी, माता-पिता और छोटी बहन का भरपूर सहयोग और प्रोत्साहन मिला।
रोजाना 14 घंटे की पढ़ाई
दीपांशी ने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर अभ्यास और अनुशासन को दिया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान प्रतिदिन लगभग 14 घंटे पढ़ाई की। उनका मानना है कि सिर्फ परीक्षा के नजदीक आने पर पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बीच के समय का सदुपयोग और सभी विषयों पर मजबूत पकड़ जरूरी है।
दीपांशी का कहना है कि न्यायाधीश के रूप में उनका उद्देश्य रहेगा कि हर पक्ष को विवेकपूर्ण ढंग से सुनवाई का अवसर मिले और मामलों का शीघ्र निपटारा हो। वह न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देंगी।
सन्दर्भ स्रोत /छाया : ईटीवी भारत
सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क



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