सुप्रीम कोर्ट : प्रेम संबंधों का बिगड़ना, रेप

blog-img

सुप्रीम कोर्ट : प्रेम संबंधों का बिगड़ना, रेप
केस दर्ज कराने का कारण नहीं बनना चाहिए

​​​​नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के झूठे वादे के आधार पर रेप के मामले दर्ज करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि प्रेम संबंधों का बिगड़ना और जोड़ों का अलग होना, आदर्श रूप से महिलाओं के रेप के मामले दर्ज कराने का कारण नहीं होना चाहिए, विशेष रूप से समाज में बदलते नैतिक मूल्यों के संदर्भ में यह नहीं होना चाहिए। 

अदालत में एक व्यक्ति ने रेप के आरोपों को रद्द करने की मांग की थी। आरोप उसकी मंगेतर रही महिला ने लगाया था, जिससे सगाई टूट गई थी। महिला का दावा था कि विवाह के झूठे वादे कर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। 

महिला को भोली नहीं कहा जा सकता 

सीनियर वकील माधवी दीवान पीड़िता की ओर से पेश हुईं। अदालत ने कहा कि यह तथ्य कि महिला ने इतनी वरिष्ठ अधिवक्ता को नियुक्त किया है, स्वयं प्रमाणित करता है कि उसे भोली नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि आप बालिग थीं। यह नहीं कहा जा सकता कि आपको धोखे से यह विश्वास दिलाया गया कि आपसे विवाह किया जाएगा।

एक जेंडर के प्रति न करें पक्षपात 

अदालत ने कहा कि ऐसे मामले अक्सर समाज की रूढ़िवादी मानसिकता के परिणाम होते हैं, क्योंकि इसमें हमेशा पुरुष को दोषी ठहराया जाता है। हम इसे केवल एक ही दृष्टिकोण से नहीं देख सकते। हमें किसी एक जेंडर के प्रति पक्षपात नहीं रखना चाहिए। हमारे घर में भी बेटी हैं और यदि वह भी इसी स्थिति में होती है, तो इसे व्यापक दृष्टिकोण से देखना होता। 

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



मप्र हाईकोर्ट :  लंबी जुदाई और आर्थिक
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : लंबी जुदाई और आर्थिक , अस्थिरता भी ‘मानसिक क्रूरता

अदालत ने पत्नी की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया और फैमिली कोर्ट बैतूल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तलाक की मांग क...

कर्नाटक हाईकोर्ट : 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर
अदालती फैसले

कर्नाटक हाईकोर्ट : 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर , लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं

अदालत ने कहा— “छोटी-मोटी पारिवारिक नोक-झोंक को अपराध बनाकर धारा 498-A के तहत मामला दर्ज कर देना कानून का दुरुपयोग है।”

बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी
अदालती फैसले

बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी , पर अफेयर के आरोप लगाना मानसिक क्रूरता

पत्नी के आरोप बेबुनियाद, डॉक्टर पति को मिला तलाक, पत्नी को मिलेगा 25 लाख गुजारा भत्ता

दिल्ली हाई कोर्ट : बहू का रहने का अधिकार मालिकाना हक नहीं
अदालती फैसले

दिल्ली हाई कोर्ट : बहू का रहने का अधिकार मालिकाना हक नहीं

कोर्ट ने साफ कहा है कि यह अधिकार सुरक्षा से जुड़ा है, खासतौर पर तब, बुज़ुर्ग सास-ससुर को मानसिक और शारीरिक नुकसान हो रहा...

छग हाईकोर्ट : अवैध संबंध को आत्महत्या
अदालती फैसले

छग हाईकोर्ट : अवैध संबंध को आत्महत्या , के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता

कोर्ट की टिप्पणी - नैतिक रूप से गलत, लेकिन कानूनी अपराध नहीं, कोर्ट ने पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ याचिका खारिज की

तेलंगाना हाई कोर्ट : 'नौकरीपेशा पत्नी का  खाना
अदालती फैसले

तेलंगाना हाई कोर्ट : 'नौकरीपेशा पत्नी का  खाना , न बनाना,  तलाक का आधार नहीं हो सकता'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलग घर की मांग करना क्रूरता के दायरे में आता है, लेकिन हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह हर मामल...