दिल्ली हाईकोर्ट : पति की सैलरी बढ़ी

blog-img

दिल्ली हाईकोर्ट : पति की सैलरी बढ़ी
तो पत्नी का गुजारा भत्ता भी बढ़ेगा  

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अगर पति की सैलरी और रोजमर्रा के खर्चे बढ़ेंगे तो अलग रह रही पत्नी का गुजारा भर्ता बढ़ाना भी जरूरी है।कोर्ट का मानना है कि आज की बढ़ती महंगाई को देखते हुए अलग रह रही पत्नी को जीवनयापन में मुश्किल हो सकती है।

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने यह फैसला एक 60 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गुजारा भत्ता बढ़ाने की उसकी अपील को खारिज कर दिया गया था।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला एक ऐसे जोड़े का था जिनकी शादी 1990 में हुई थी, लेकिन वे दो साल बाद ही अलग रहने लगे। महिला ने अपने पति पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ दहेज मांगने का आरोप लगाया था। साल 2012 में, फैमिली कोर्ट ने पति को हर महीने 10,000 रुपये का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। 

2018 में, महिला ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की। उसने दलील दी कि उसके पति को टीजीटी से पीजीटी पद पर प्रमोशन मिला है, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, पति 2017 में ही रिटायर हो चुके थे, लेकिन उन्हें दो साल का एक्सटेंशन मिला था। महिला ने यह भी बताया कि उनके पिता, जो उन्हें आर्थिक मदद करते थे, अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। पिछले साल सितंबर में फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पति की आर्थिक स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही, क्योंकि वे रिटायर हो चुके हैं। 

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट यह समझने में विफल रहा कि 2012 में पति की आय 28,000 रुपये थी, जिसके आधार पर भत्ता तय हुआ था। हालांकि, यह राशि आदेश पारित होने तक 40,000 रुपये हो गई थी। जस्टिस शर्मा ने कहा, "पति की आय में वृद्धि और जीवनयापन की लागत में बढ़ोतरी, यह साफ दिखाता है कि हालात बदल गए हैं, और गुजारा भत्ते की राशि बढ़ाना ज़रूरी है।" इस फैसले से उन सभी महिलाओं को उम्मीद मिलेगी, जिनके गुजारा भत्ते के मामले लंबित हैं। 

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



मप्र हाईकोर्ट :  लंबी जुदाई और आर्थिक
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : लंबी जुदाई और आर्थिक , अस्थिरता भी ‘मानसिक क्रूरता

अदालत ने पत्नी की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया और फैमिली कोर्ट बैतूल के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तलाक की मांग क...

कर्नाटक हाईकोर्ट : 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर
अदालती फैसले

कर्नाटक हाईकोर्ट : 498-A केवल गंभीर क्रूरता पर , लागू, वैवाहिक असंगति या अपूर्ण विवाह पर नहीं

अदालत ने कहा— “छोटी-मोटी पारिवारिक नोक-झोंक को अपराध बनाकर धारा 498-A के तहत मामला दर्ज कर देना कानून का दुरुपयोग है।”

बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी
अदालती फैसले

बिलासपुर हाईकोर्ट : सबूत के बिना जीवनसाथी , पर अफेयर के आरोप लगाना मानसिक क्रूरता

पत्नी के आरोप बेबुनियाद, डॉक्टर पति को मिला तलाक, पत्नी को मिलेगा 25 लाख गुजारा भत्ता

दिल्ली हाई कोर्ट : बहू का रहने का अधिकार मालिकाना हक नहीं
अदालती फैसले

दिल्ली हाई कोर्ट : बहू का रहने का अधिकार मालिकाना हक नहीं

कोर्ट ने साफ कहा है कि यह अधिकार सुरक्षा से जुड़ा है, खासतौर पर तब, बुज़ुर्ग सास-ससुर को मानसिक और शारीरिक नुकसान हो रहा...

छग हाईकोर्ट : अवैध संबंध को आत्महत्या
अदालती फैसले

छग हाईकोर्ट : अवैध संबंध को आत्महत्या , के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता

कोर्ट की टिप्पणी - नैतिक रूप से गलत, लेकिन कानूनी अपराध नहीं, कोर्ट ने पति और गर्लफ्रेंड के खिलाफ याचिका खारिज की

तेलंगाना हाई कोर्ट : 'नौकरीपेशा पत्नी का  खाना
अदालती फैसले

तेलंगाना हाई कोर्ट : 'नौकरीपेशा पत्नी का  खाना , न बनाना,  तलाक का आधार नहीं हो सकता'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलग घर की मांग करना क्रूरता के दायरे में आता है, लेकिन हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह हर मामल...