यूनिसेफ पहुंचने वाली पहली

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यूनिसेफ पहुंचने वाली पहली
श्रवण बाधित खिलाड़ी बनी गौरांशी

छाया : हिन्दुस्थान समाचार

शहर की बैडमिंटन खिलाड़ी गौरांशी शर्मा प्रदेश की पहली ऐसी खिलाड़ी होंगी जो यूनीसेफ की जनरल असेंबली में शिरकत करेंगी। वे इसके लिए अपनी मां के साथ न्यूयार्क पहुंच गई हैं। वे ऐसी पहली डेफ़ खिलाड़ी हैं, जिसे यूनीसेफ ने भारत का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था। गौरांशी की मां प्रीति शर्मा और पिता गौरव शर्मा भी डेफ़ हैं। गौरांशी वर्ल्ड बैडमिंटन में दो स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।

उल्लेखनीय है कि यूनिसेफ द्वारा 20 से 24 सितम्बर 2024 तक Youth Advocates Mobilisation Lab का आयोजन यूनिसेफ हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क (अमेरिका) में किया जा रहा है। न्यूयॉर्क में इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं एवं बच्चों के सर्वोत्तम हितों को सुनिश्चित करने, उनके अनुभवों एवं उनके मध्य नेटवर्क बनाने और उनमें कौशल विकसित करने तथा उनके मानवाधिकारों को बनाए रखने के साथ जीवन के कई क्षेत्रों में युवाओं की मदद करना है।

समर कैंप से शुरुआत

बात अप्रैल 2015 की है, तब गौरांशी करीब आठ साल की थी तब वह अपने माता-पिता के साथ टीटी नगर स्टेडियम आई थी। वह स्टेडियम में खेल चुनने के हिसाब से आई थी। तब समर कैंप चल रहे थे। उस दौरान उन्होंने स्टेडियम में सभी खेल देखे। सबसे पहले एथलेटिक्स, जूडो, बास्केटबॉल, जिम्नास्टिक, टेनिस और बाद में बैडमिंटन हाल पहुंची। उन्हें बैडमिंटन पसंद आया। चूंकि गौरांशी और माता-पिता न तो बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं इसलिए जो कुछ भी बात स्टेडियम प्रभारी विकास खराडकर और बैडमिंटन कोच रश्मि मालवीय से हुई वो साइन लैंग्वेज में हुई।

साइन लैंग्वेज से ही तय हुआ कि कल से गौरांशी बैडमिंटन खेलने नियमित आएंगी। उन्होंने किया भी वैसा। दो महीने समर कैंप में नियमित हिस्सा लिया। क्लोजिंग सेरेमनी में उन्हें बेस्ट प्लेयर के रूप में चुना गया। उन्हें तत्कालीन खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने अकादमी में प्रवेश देने  के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। बस यहीं से गौरांशी के बैडमिंटन करियर की शुरुआत हुई। चूंकि भोपाल में बैडमिंटन अकादमी नहीं है, उसका फीडर सेंटर है। फीडर सेंटर में गौरांशी ने अपने खेल को दो साल तक तराशा और मप्र बैडमिंटन अकादमी ग्वालियर की और रूख किया। वहीं से नेशनल और इंटरनेशनल करियर की शुरुआत हुई। वे इस समय मप्र की नंबर-1 डेफ़ बैडमिंटन खिलाड़ी हैं और हैदराबाद में गोपीचंद अकादमी में अपने खेल को निखार रही हैं।

उन्होंने नेशनल में एक स्वर्ण, सात रजत और तीन कांस्य समेत कुल 11 पदक जीते हैं। लेकिन उनको सबसे बड़ी सफलता पिछले वर्ष ब्राजील में मिली, तब उन्होंने 6वें वर्ल्ड यूथ बैडमिंटन की टीम इवेंट में स्वर्ण जीता। इससे पहले वे 2022 में समर डेफ़ ओलिंपिक ब्राजील में ही मिक्सड इवेंट में स्वर्ण जीत चुकी थीं। इस तरह अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण और तीन कांस्य पदक उनके नाम हैं।

सन्दर्भ स्रोत : दैनिक भास्कर

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