रतलाम। शिवपुर गांव की प्रतिभाशाली छात्रा अर्चना पांचाल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी) परीक्षा में प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल कर रतलाम और मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है। घोषित परिणाम में करीब 6 हजार अभ्यर्थियों के बीच अर्चना ने पहली रैंक प्राप्त की। इस परीक्षा में कुल 85 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।
दूसरे प्रयास में मिली ऐतिहासिक सफलता
अर्चना ने बताया कि उनके पिता रमेशचंद्र पांचाल एक किसान हैं। यह सफलता उन्हें दूसरे प्रयास में मिली है। वर्ष 2024 में पहले प्रयास में वह साक्षात्कार तक पहुंची थीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। इसी समर्पण और लगन का परिणाम इस बार प्रदेश की टॉपर बनकर सामने आया।
वर्तमान में अर्चना पांचाल इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में हिंदी विषय से पीएचडी की शोधार्थी हैं। उन्होंने रतलाम के शासकीय कन्या महाविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की है। MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का आयोजन 1 जून 2025 को हुआ था।
11 साल की उम्र में मां का साया उठा, पिता ने खेती कर पढ़ाया
जब अर्चना केवल 11 वर्ष की थीं, तब उनकी माता विष्णुबाई का निधन हो गया था। इसके बाद पिता रमेशचंद्र ने खेती कर परिवार की जिम्मेदारी निभाई और बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। बड़े भाई सुनील पिता के साथ खेती करते हैं, जबकि छोटे भाई अनिल की मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान है।
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संघर्ष से सफलता तक का सफर बना प्रेरणा
अर्चना पांचाल ने अपनी सफलता का श्रेय पिता, भाइयों, गुरुओं और परिवार के सहयोग को दिया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल शिवपुर गांव बल्कि पूरे रतलाम जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का संकल्प रखते हैं।



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