Allahabad High Court ने Live In Relationship को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर लड़के की उम्र 21 साल से कम है तो ऐसे जोड़े को कानूनी सुरक्षा नहीं दी जा सकती। अदालत ने साफ कहा कि कानून में पुरुष की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष तय है इसलिए ऐसे रिश्ते को पूरी तरह परिपक्व नहीं माना जा सकता।
यह फैसला बिजनौर के एक अंतरधार्मिक जोड़े की याचिका पर सुनाया गया। मामले में 20 वर्षीय मुस्लिम युवती और 19 वर्षीय हिंदू युवक ने कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी। दोनों ने कहा था कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं लेकिन युवती के परिवार की ओर से लगातार धमकियां मिल रही हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Garima Prasad की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार है लेकिन इस स्वतंत्रता का इस्तेमाल कानून को कमजोर करने के लिए नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर लड़के की उम्र 21 साल से कम है तो उसे कानूनी रूप से पूरी तरह मेच्योर नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक शक्तियों का उपयोग किसी अवैध स्थिति को वैध बनाने के लिए नहीं किया जा सकता।
हालांकि कोर्ट ने यह जरूर कहा कि यदि जोड़े को अपनी जान का खतरा महसूस होता है तो वे पुलिस से मदद ले सकते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होगा कि माता-पिता या कानून को वैधानिक कार्रवाई करने से रोका जाए।
कोर्ट ने पाया कि मामले में खतरे के पर्याप्त सबूत भी प्रस्तुत नहीं किए गए थे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *