प्रमिला सायदाम - मुर्गी पालन और

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प्रमिला सायदाम - मुर्गी पालन और
जैविक खेती से बदली तकदीर

छाया : पीआरओ बडवानी के फेसबुक अकाउंट से

बड़वानी जिले के आकांक्षी विकासखंड के ग्राम पोसपुर की रहने वाली प्रमिला सायदाम आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। कभी रोजगार की तलाश में परिवार सहित पलायन करने को मजबूर प्रमिला अब अपने ही गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।

मजदूरी के लिए बाहर जाना पड़ता था, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। इसी दौरान प्रमिला ग्राम के ‘प्रभु स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह की बैठकों और प्रशिक्षण से उन्हें स्वरोजगार की जानकारी मिली और आत्मविश्वास बढ़ा। 

400 चूजों से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद प्रमिला ने 400 मुर्गी के चूजों के साथ मुर्गी पालन की शुरुआत की। उनकी मेहनत रंग लाई और यह कार्य उनकी नियमित आय का प्रमुख स्रोत बन गया। मुर्गी पालन में सफलता मिलने के बाद उन्होंने बकरी पालन भी शुरू किया। आज वे अपने घर के पास की जमीन पर जैविक तरीके से सब्जी और गेहूं की खेती कर रही हैं। खेती और पशुपालन के इस मॉडल ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना दिया है।

अब नहीं करना पड़ता पलायन, बच्चों को मिल रही बेहतर शिक्षा

प्रमिला बताती हैं, “अब मजदूरी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। करीब एक साल से पति के साथ गांव में ही रहकर खेती और पशुपालन से आजीविका चला रहे हैं। बच्चे अब बड़वानी के निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।” 

आकांक्षी विकासखंड के भ्रमण के दौरान जिला कलेक्टर जयति सिंह ने प्रमिला से मुलाकात की और उनकी सफलता की कहानी सुनी। उनकी मेहनत से प्रभावित होकर कलेक्टर ने उनका हौसला बढ़ाया और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं 

प्रमिला  की यह कहानी दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज में नई पहचान भी बना सकती हैं। मुर्गी पालन, बकरी पालन और जैविक खेती जैसे छोटे व्यवसाय आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

सन्दर्भ स्रोत : ईटीवी भारत

सम्पादन : मीडियाटिक डेस्क 

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