जबलपुर हाईकोर्ट :   'परंपरा' का हवाला देकर

blog-img

जबलपुर हाईकोर्ट :   'परंपरा' का हवाला देकर
बहुविवाह को वैध नहीं ठहराया जा सकता

जबलपुर। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती। केवल आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपत्ति या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। इस मत के साथ कोर्ट ने शहडोल निवासी महिला की याचिका निरस्त कर दी

शहडोल की निवासी मुन्नी बाई की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि वह भगत सिंह की दूसरी पत्नी है। वे पाव जनजाति से हैं। पांच जनजाति में बहुविवाह की परंपरा है। इसलिए उन पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उसने पति की मृत्यु के बाद पति की संपत्ति में हिस्सा और नौकरी से जुड़े लाभ देने की मांग की। मृतक की पहली पत्नी फूलमती की ओर से इसका विरोध किया गया।

तर्क दिया गया कि फूलमती मृतक की अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के रूप में उसी का नाम दर्ज है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण या पूर्व न्यायिक निर्णय भी नहीं बताया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी , शादी, फिर भी महिला को मिलेगा भरण-पोषण

हाईकोर्ट ने विवादित दूसरी शादी मामले में महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख
अदालती फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख , गुजारा भत्ता के बाद भी केस लड़ना उत्पीड़न

कोर्ट ने बुजुर्ग दंपति को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को खारिज कर दिया है।

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से
अदालती फैसले

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से , बड़ा झटका, महिला और बेटे को देना होगा भरण-पोषण

डीएनए टेस्ट से इन्कार करने वाले शिक्षक को हाई कोर्ट ने महिला और बच्चे को भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता , बच्चे के अधिकार नहीं छीन सकता

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के आपसी समझौते से बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार खत्म नहीं हो सकते। अदालत ने गुजारा भत्...

सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : पर्दे के पीछे अब भी जारी है , लिंग चयन, जांच कानून सख्त हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लिंग चयन जैसी अवैध प्रथाएं अब भी जारी हैं। कोर्ट ने कहा- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं जर...

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : अब प्राइवेट स्कूलों की महिला , टीचर्स को भी मिलेगी चाइल्ड केयर लीव

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल की महिला शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया