केरल हाईकोर्ट : किसी महिला के खिलाफ अप्रिय

blog-img

केरल हाईकोर्ट : किसी महिला के खिलाफ अप्रिय
और मानहानिकारक बातें, शील भंग नहीं

 

कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने फिल्म और ऐड डायरेक्टर श्रीकुमार मेनन के खिलाफ दायर एक केस को खारिज कर दिया हैमेनन के खिलाफ ये केस एक मलयालम फिल्म एक्ट्रेस ने दर्ज कराया थाउसने मेनन पर ‘आपत्तिजनक’ भाषा का इस्तेमाल करने और एक फिल्म की शूटिंग के दौरान ‘बुरा’ बर्ताव करने का आरोप लगाया थाडायरेक्टर की अपील पर केरल हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि ‘केवल अप्रिय या अपमानजनक शब्द किसी महिला की गरिमा का अपमान नहीं हैं

बता दें कि श्रीकुमार मेनन के खिलाफ त्रिशूर ईस्ट पुलिस स्टेशन में साल 2019 में FIR दर्ज की गई थी। अपनी शिकायत में एक्ट्रेस ने बताया था कि उन्होंने एक चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन बनाया था। अपने इस ऑर्गनाइजेशन की गतिविधियों के लिए उन्होंने श्रीकुमार मेनन की ऐड एजेंसी 'PUSH' के साथ एग्रीमेंट किया था। उन्होंने 'PUSH' के साथ कुछ विज्ञापनों में भी काम किया. 2013 में उनके और 'PUSH' के बीच हुआ एग्रीमेंट मेनन के साथ उनके कुछ मतभेदों के कारण 2017 में टर्मिनेट हो गया था।

एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि इसके बाद, मेनन ने एक्ट्रेस के साथ 'अभद्र व्यवहार' किया। साल 2018 में मेनन द्वारा निर्देशित फिल्म में एक्टिंग के दौरान उन्हें 'मानसिक रूप से परेशान' किया। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि फिल्म की रिलीज़ और प्रमोशन के समय श्रीकुमार मेनन उन्हें ‘बदनाम करने’ में लगे रहे। एक्ट्रेस ने अपनी शिकायत में आगे आरोप लगाया था कि अप्रैल 2018 से, मेनन ने फेसबुक और फोन के जरिए उनके करियर और सम्मान को प्रभावित करने वाले मैसेज भेजे। एक्ट्रेस की शिकायत पर श्रीकुमार मेनन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। इनमें IPC की धारा 354D (पीछा करना), 294(b) (अश्लील हरकत), 509 (किसी महिला के शील या गरिमा के ठेस पहुंचाने के इरादे से की गई हरकत) जैसी धाराएं शामिल थीं। इसके अलावा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(o) (किसी व्यक्ति को परेशान करना) भी लगाई गई।

श्रीकुमार मेनन को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। श्रीकुमार मेनन इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। अब कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। उसने कहा कि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने या उनकी निजता में दखल देने के इरादे के बिना अप्रिय या अपमानजनक शब्द कहना IPC की धारा 509 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। मेनन के खिलाफ अन्य धाराओं के तहत भी अपराध सिद्ध नहीं हो पाया  और कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज किए गए केस को खारिज कर दिया।

संदर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

 

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार
अदालती फैसले

सुप्रीम कोर्ट : अनुकंपा नियुक्ति में विवाहित बेटियों को भी समान अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने इसे समानता और संवैधानि...

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक
अदालती फैसले

दिल्ली हाईकोर्ट : आपस में क्रूरता के आरोप लगाने पर नहीं मिलेगा सहमति से तलाक

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे पर क्रूरता के आरोप लगाने की स्थिति को आपसी सहमति से तलाक नहीं माना ज...

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी
अदालती फैसले

मप्र हाईकोर्ट : पहली शादी छुपाकर की दूसरी , शादी, फिर भी महिला को मिलेगा भरण-पोषण

हाईकोर्ट ने विवादित दूसरी शादी मामले में महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख
अदालती फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट: तलाक और 20 लाख , गुजारा भत्ता के बाद भी केस लड़ना उत्पीड़न

कोर्ट ने बुजुर्ग दंपति को राहत देते हुए उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमे को खारिज कर दिया है।

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से
अदालती फैसले

डीएनए टेस्ट से पीछे हटे शासकीय शिक्षक को हाई कोर्ट से , बड़ा झटका, महिला और बेटे को देना होगा भरण-पोषण

डीएनए टेस्ट से इन्कार करने वाले शिक्षक को हाई कोर्ट ने महिला और बच्चे को भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता
अदालती फैसले

हिप्र हाईकोर्ट : माता-पिता का समझौता , बच्चे के अधिकार नहीं छीन सकता

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता के आपसी समझौते से बच्चे के भरण-पोषण के अधिकार खत्म नहीं हो सकते। अदालत ने गुजारा भत्...