मप्र हाईकोर्ट : लड़की बालिग है, उसे अपनी

blog-img

मप्र हाईकोर्ट : लड़की बालिग है, उसे अपनी
पसंद से रहने का पूरा अधिकार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक अहम मामले में साफ कर दिया कि अगर लड़की बालिग है तो उसे अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है। इसी आधार पर कोर्ट ने बाबिता तोमर की याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला बाबिता तोमर की याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी नंदिनी तोमर को अभिषेक शर्मा ने अपने पास जबरन रखा हुआ है। इस पर कोर्ट ने नंदिनी को पेश करने के निर्देश दिए।

मर्जी से विवाह की पुष्टि

सुनवाई के दौरान नंदिनी तोमर खुद कोर्ट में पेश हुईं। पुलिस थाना गोला का मंदिर की सब-इंस्पेक्टर शिखा डंडोतिया नंदिनी को लेकर कोर्ट पहुंचीं। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की बेंच ने नंदिनी से सीधे सवाल किया। इस पर नंदिनी ने साफ कहा कि वह बालिग है और जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर में बीकॉम एलएलबी की पढ़ाई कर रही है। उसने अपनी मर्जी से अभिषेक शर्मा से शादी की है और वह उसके साथ ही रहना चाहती है।

 

ये भी पढ़िए ....

छग हाईकोर्ट : युवती बालिग और सहमति तो यौन शोषण नहीं माना जा सकता

ओडिशा हाईकोर्ट : विवाह के लिए बेटी की रजामंदी जरूरी

18 साल के पहले बालिका का नहीं कराएंगे विवाह, राजस्थान हाईकोर्ट ने माता-पिता से लिया वचन

 

कोर्ट का निर्णय

अभिषेक शर्मा ने भी कोर्ट में कहा कि उसने नंदिनी से अपनी इच्छा से विवाह किया है और वह उसका पूरा ख्याल रखेगा। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि नंदिनी की पढ़ाई जारी रखी जाएगी और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दोनों की बात सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि नंदिनी बालिग है और अपनी मर्जी से पति के साथ रहना चाहती है, इसलिए उसे रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अब इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह जाता।

 'शौर्या दीदी' की जिम्मेदारी

हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि नंदिनी जब चाहे अपने माता-पिता से मिल सकती है और उनके घर आ-जा सकती है। कोर्ट ने इस मामले में सरकारी वकील अंजलि ज्ञानानी और सब-इंस्पेक्टर शिखा डंडोतिया को शौर्या दीदी की जिम्मेदारी भी दी, ताकि वे नंदिनी और उसके परिवार का ध्यान रख सकें।

Comments

Leave A reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



झारखंड हाईकोर्ट : जिंदगी के सामान्य उतार-चढ़ाव क्रूरता नहीं
अदालती फैसले

झारखंड हाईकोर्ट : जिंदगी के सामान्य उतार-चढ़ाव क्रूरता नहीं

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए क्रूरता का व्यवहार इतना गंभीर होना चाहिए कि साथ रहना असहनीय हो जाए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट : बीवी और बच्‍चे पालने की
अदालती फैसले

इलाहाबाद हाईकोर्ट : बीवी और बच्‍चे पालने की , हैसियत नहीं तो शादी नहीं करनी चाहिए

कहा - शादी के बाद आर्थिक तंगी का उलाहना देकर अपनी जिम्मेदारी से भागा नहीं जा सकता। 

उत्तराखंड हाई कोर्ट : बच्चे के भरण-पोषण
अदालती फैसले

उत्तराखंड हाई कोर्ट : बच्चे के भरण-पोषण , की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते पिता

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिता को बच्चे के लिए 8000 रुपये मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट : तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा
अदालती फैसले

उड़ीसा हाईकोर्ट : तलाक के बाद भी पत्नी को मिलेगा , भरण पोषण छोड़ने का आधार नहीं बनेगा रुकावट

पति को झटका पत्नी छोड़कर गई फिर भी देना होगा गुजारा भत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट : बहू भी होगी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार
अदालती फैसले

राजस्थान हाईकोर्ट : बहू भी होगी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार

अब ससुर की मृत्यु के बाद बहू को भी मिलेगा नौकरी का अधिकार जानिए क्या हैं नियम और पात्रता