लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के झूठे वादे के आधार पर दर्ज रेप केस की कार्यवाही को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि हर प्रेम संबंध का नतीजा शादी ही हो, यह जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि आपसी तालमेल न बैठने, प्राथमिकताएं बदलने या अन्य व्यक्तिगत कारणों से भी रिश्तों का अंत हो सकता है।
कोर्ट ने कहा कि पढ़े-लिखे और बालिग व्यक्तियों को यह समझना चाहिए कि यदि कोई रिश्ता सफल नहीं होता, तो केवल उसी आधार पर उसे आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। रिश्तों से जुड़े मामलों को दोनों पक्षों की स्वतंत्रता, पसंद और गरिमा का सम्मान करते हुए देखा जाना चाहिए।
यह मामला प्रयागराज के कर्नलगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां वर्ष 2019 में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 323, 504 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
सहमति से बने संबंध को केवल शादी न होने पर रेप नहीं कहा जा सकता
• हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चले सहमति-आधारित संबंध को केवल इसलिए रेप नहीं माना जा सकता क्योंकि बाद में शादी नहीं हुई।
• अदालत ने रिकॉर्ड, परिस्थितियों और दोनों पक्षों की दलीलों का विश्लेषण करते हुए पाया कि संबंध आपसी सहमति से बने थे। इसलिए आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया रेप का अपराध नहीं बनता।
• अपने 34 पृष्ठों के फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि महिला ने स्वेच्छा से सहमति दी थी, तो आरोपी को रेप का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
एफआईआर दबाव बनाने के लिए दर्ज की गई थी : कोर्ट
• कोर्ट ने कहा कि इस मामले में रेप का कोई अपराध नहीं बनता। अदालत के अनुसार, एफआईआर महिला द्वारा आरोपी के व्यवहार से नाराज होकर दर्ज कराई गई थी।
• कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला ने उसी आरोपी से शादी कर ली, जिससे यह संकेत मिलता है कि एफआईआर का उद्देश्य आरोपी पर शादी के लिए दबाव बनाना था।
• अदालत ने कहा कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी धाराओं में चल रही कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।
यह आदेश विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने संजय सरोज की याचिका स्वीकार करते हुए पारित किया।
ये भी पढ़िए ...
सुप्रीम कोर्ट : प्रेम संबंधों का बिगड़ना, रेप केस दर्ज कराने का कारण नहीं बनना चाहिए
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट : शादीशुदा महिला की सहमति से बना शारीरिक संबंध बलात्कार नहीं
ग्वालियर हाईकोर्ट : आपसी सहमति से बने संबंध गैर-आपराधिक
मारपीट, धमकी और ब्लैकमेल के आरोप
• शिकायतकर्ता महिला मूल रूप से प्रतापगढ़ की रहने वाली थी और वर्ष 2014 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज आई थी।
• आरोपी, जो उसका दूर का रिश्तेदार था, ने उसकी पढ़ाई और रहने में मदद की। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उनके बीच संबंध स्थापित हुए।
• एफआईआर में महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इंकार कर दिया। महिला का यह भी आरोप था कि शादी की बात करने पर आरोपी उसके साथ मारपीट करता था और धमकी देता था।
• जांच के दौरान महिला ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया था।
पांच वर्षों तक चला संबंध, सहमति पर आधारित था
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों के बीच संबंध 2014 से 2019 तक, यानी लगभग पांच वर्षों तक चला। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि शुरुआत से ही आरोपी का इरादा धोखा देने का था।
हाईकोर्ट ने प्रमोद सूर्यभान पवार, रविश सिंह राणा और दीपक गुलाटी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रेप का मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और उसी आधार पर सहमति प्राप्त की गई थी।
रिश्ता टूटने को रेप का मामला बनाना कानून का दुरुपयोग
• अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक चले संबंध में यह मानना कठिन है कि हर बार दी गई सहमति केवल शादी के वादे के कारण ही थी।
• कोर्ट के अनुसार, यदि लंबे समय तक चले प्रेम संबंध में बाद में विवाद उत्पन्न हो जाए, तो उसे सीधे रेप का मामला बना देना कानून का दुरुपयोग होगा।
• अंततः हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला सहमति से बने संबंध के बाद रिश्ते के बिगड़ने का है, न कि झूठे वादे के आधार पर धोखे से बनाए गए संबंध का। इसलिए आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है।



Comments
Leave A reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *