अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वैध विवाह के भीतर पति-पत्नी के बीच यौन संबंधों में 'सहमति' का प्रश्न कानूनी रूप से अप्रासंगिक है.
दोनों फैसलों ने अलग-अलग व्याख्याएं सामने रखीं, जो अब चर्चा का केंद्र बन चुकी हैं।
अंततः स्त्री होने का अर्थ किसी सीमा या बंधन में बँधना नहीं, बल्कि अपने भीतर निहित संभावनाओं को पहचानना एवं उन्हें साकार करना है
इन सारी घटनाओं में पीड़ित कौन है, इसका पता कितना सत्य है और असल में तो जांच के बाद ही चलेगा। लेकिन इतना तय है कि विवाह संस्था पर अ...
इस दौर में भी आखिर क्यों मछली जल की रानी है की तर्ज पर एक महिला को किचन की रानी बना दिया गया है, पुरुष क्यों नहीं 'रसोई का महाराज'...
मुख्य उद्देश्य -जनसमुदाय की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के साथ बाल विवाह जैसी कुरीति को सामुदायिक सहभागिता से समाप्त करना है ।

