मध्यप्रदेश के रायसेन जिले की 21 वर्षीय खुशी गहलोत ने यह साबित कर दिया है कि सपनों की उड़ान आर्थिक हालात की मोहताज नहीं होती। एक साधारण परिवार से आने वाली खुशी अब देश की प्रतिष्ठित इंडियन विमेंस लीग में अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगी। वह DFA रायसेन का प्रतिनिधित्व करते हुए मिडफील्ड में अपनी प्रतिभा का दम दिखाएंगी।
छोटे शहर से बड़े मंच तक का सफर
खुशी एक ड्राइवर की बेटी हैं। उनके पिता की रोज़ की मेहनत से घर का खर्च चल पाता है। सीमित संसाधनों के बीच फुटबॉल जैसे खेल में करियर बनाना आसान नहीं था। अच्छे जूते, संतुलित डाइट और ट्रेनिंग का खर्च जुटाना परिवार के लिए चुनौती था, लेकिन खुशी के इरादे मजबूत थे।
2017 में स्कूल स्तर से फुटबॉल की शुरुआत करने वाली खुशी को एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान स्काउट किया गया। इसके बाद उन्होंने रीजनल टीम में जगह बनाई और अपनी तेज रफ्तार व दमदार स्टैमिना से सबका ध्यान खींचा।
जब जूते खरीदने के लिए करनी पड़ी नौकरी
खुशी बताती हैं कि शुरुआत में उनके पास स्पाइक्स तक नहीं थे। लगभग डेढ़ साल तक उन्होंने निजी नौकरी की। दिन में काम और रात में कठिन अभ्यास करना, यह उनकी दिनचर्या बन गई थी। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने अपने लिए फुटबॉल शूज़ खरीदे और ट्रेनिंग जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई और आज वह IWL में एक एलीट सेंट्रल मिडफील्डर के रूप में पहचान बना रही हैं।
पहली बार IWL में उतरेगा DFA रायसेन
DFA रायसेन ने पहली बार इंडियन विमेंस लीग के लिए क्वालीफाई किया है। खुशी इस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा हैं। वह कहती हैं, “मैं जो भी गोल करती हूं, वह अपने परिवार और रायसेन के लिए करती हूं।”
संघर्ष अब भी जारी
सीनियर नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी के लिए खुशी ने नौकरी छोड़ दी, ताकि पूरा ध्यान खेल पर लगा सकें। आर्थिक चुनौतियां आज भी हैं, लेकिन उनका आत्मविश्वास और जुनून अटूट है।
सन्दर्भ स्रोत एवं छाया : एनबीटी



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