सुप्रीम कोर्ट : हर संबंध के टूटने को झूठे विवाह

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सुप्रीम कोर्ट : हर संबंध के टूटने को झूठे विवाह
के बहाने का रूप नहीं दिया जा सकता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति पर आधारित हर संबंध, जिसमें विवाह की संभावना हो सकती है, उस संबंध के टूटने पर झूठे विवाह के बहाने का रूप नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि रिश्तों के बिगड़ने पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश निरस्त किया

शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को 2015 में दर्ज बलात्कार के एक मामले में आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया गया था। अपीलकर्ता कोलकाता सिटी सिविल कोर्ट में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद से सेवानिवृत्त हुए एक पूर्व न्यायिक अधिकारी थे।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 2014 में, जब वह अपने पूर्व पति से वैवाहिक विवाद को लेकर कानूनी कार्यवाही में शामिल थीं, तब उनकी मुलाकात अपीलकर्ता से हुई, जो अपनी पत्नी से अलग रह रहे थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक अपीलकर्ता ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह उनसे विवाह करेंगे और उन्हें तथा उनके पहले विवाह से हुए बेटे की पूरी जिम्मेदारी लेंगे। लेकिन तलाक फाइनल होने के बाद, अपीलकर्ता ने टालमटोल करना शुरू किया और संपर्क न करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता और अपीलकर्ता के बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से थे, और यह नहीं कहा जा सकता कि वह शिकायतकर्ता की मर्जी के खिलाफ थे। यह मान भी लिया जाए कि संबंध विवाह के प्रस्ताव पर आधारित था, तब भी महिला ‘तथ्य के भ्रम’ या ‘झूठे विवाह के बहाने बलात्का’ का दावा नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि इस प्रकार का मुकदमा कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और आगे की कोई भी कार्यवाही केवल दोनों पक्षों के कष्ट को और बढ़ाएगी, जो पहले से ही अलग-अलग जीवन जी रहे हैं। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायहित में कार्यवाही समाप्त करने का निर्णय लिया।

सन्दर्भ स्रोत : विभिन्न वेबसाइट

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